धनतेरस पर 13 दीये जलाने की प्रथा क्या है? यम से लेकर कुबेर तक, घर के इन स्थानों पर दीपक रखना होता है शुभ
धनतेरस का त्योहार दीपावली की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि, माता लक्ष्मी, भगवान कुबेर और यमराज की पूजा करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस पर दीपक जलाने से घर में सुख-समृद्धि, सकारात्मकता और परिवार की खुशहाली की कामना की जाती है। इसी दिन कई घरों में 13 दीपक जलाने की परंपरा भी निभाई जाती है।
मान्यता है कि धनतेरस पर कुछ खास स्थानों पर दीपक जलाना शुभ होता है। इनमें घर के मुख्य द्वार, पूजा स्थल, रसोई और दक्षिण दिशा में यमराज के नाम का दीपक रखना शामिल है। हालांकि, दीपक जलाने की संख्या और विधि अलग-अलग परिवारों तथा क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार बदल सकती है।
धनतेरस पर 13 दीये जलाने की परंपरा क्यों है?
धनतेरस कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। धार्मिक परंपरा में इस दिन 13 दीपक जलाने का संबंध त्रयोदशी तिथि और यमराज के लिए किए जाने वाले दीपदान से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि यमराज के नाम दीपक जलाकर परिवार की लंबी उम्र और अकाल मृत्यु से रक्षा की प्रार्थना की जाती है। वहीं, भगवान कुबेर और माता लक्ष्मी के सामने दीपक जलाकर धन-धान्य और समृद्धि की कामना की जाती है।
ध्यान देने वाली बात यह है कि 13 दीपक कहां-कहां रखने हैं, इसकी कोई एक सर्वमान्य सूची नहीं है। अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में दीपक रखने की परंपरा अलग हो सकती है।
घर में इन 13 स्थानों पर रख सकते हैं दीपक
ये स्थान विभिन्न प्रचलित परंपराओं में बताए जाते हैं। अपने परिवार की पूजा-विधि के अनुसार बदलाव कर सकते हैं।
1. घर का मुख्य द्वार: प्रवेश द्वार के दोनों ओर दीपक जलाना शुभ माना जाता है। इससे घर में सुख-समृद्धि के स्वागत का प्रतीकात्मक भाव जुड़ा है।
2. मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा में: यमराज के नाम से यम दीपक जलाने की परंपरा है। इसे घर के बाहर दक्षिण दिशा की ओर रखा जाता है और परिवार की कुशलता की प्रार्थना की जाती है।
3. पूजा घर: भगवान गणेश, माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर की पूजा के समय दीपक जलाएं।
4. तुलसी के पास: तुलसी के पौधे के निकट दीपक जलाने की परंपरा कई घरों में निभाई जाती है।
5. रसोई में: रसोई को अन्न और पोषण का स्थान माना जाता है। यहां सुरक्षित जगह पर दीपक रखकर अन्नपूर्णा की कृपा की कामना की जाती है।
6. जल रखने के स्थान पर: पानी के घड़े या जल रखने वाले स्थान के पास दीपक रखने की परंपरा कुछ परिवारों में प्रचलित है।
7. धन रखने की जगह: तिजोरी या धन रखने वाले स्थान के पास दीपक जलाकर भगवान कुबेर और माता लक्ष्मी का स्मरण किया जाता है।
8. घर के आंगन में: आंगन में दीपक जलाने से घर में रोशनी और उत्सव का माहौल बनता है।
9. छत या बालकनी में: खुले स्थान पर दीपक रखकर घर को रोशन किया जा सकता है।
10. घर की खिड़कियों के पास: खिड़की के पास सुरक्षित स्थान पर दीपक रखना भी एक प्रचलित सजावटी परंपरा है।
11. घर के कोनों में: घर के अंधेरे कोनों में दीपक रखकर रोशनी की जाती है।
12. घर के पिछले दरवाजे पर: जिन घरों में दूसरा प्रवेश द्वार है, वहां भी दीपक जलाने की परंपरा कुछ जगहों पर है।
13. घर के बाहरी हिस्से में: घर की दहलीज या आंगन के किसी अन्य सुरक्षित स्थान पर दीपक रखकर दीपदान की परंपरा पूरी की जा सकती है।
यम दीपक जलाने की सही विधि क्या है?
धनतेरस पर यम दीपदान का विशेष महत्व माना जाता है। इसके लिए शाम के समय मिट्टी का दीपक लेकर उसमें तेल और बाती रखें। परंपरा के अनुसार दीपक को घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर रखकर यमराज से परिवार की लंबी उम्र और मंगल की प्रार्थना की जाती है। कुछ परिवारों में चौमुखा दीपक जलाने की भी परंपरा है।
भगवान कुबेर और माता लक्ष्मी के लिए कहां जलाएं दीपक?
धार्मिक और वास्तु संबंधी मान्यताओं में उत्तर दिशा को कुबेर से जोड़ा जाता है। इसलिए कुछ परिवार धन रखने की जगह या पूजा स्थल के पास दीपक जलाते हैं। माता लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा के दौरान भी दीप प्रज्वलित किया जाता है। हालांकि, दीपक की दिशा या संख्या को लेकर सभी परंपराओं में एक जैसे नियम नहीं हैं।
धनतेरस पर दीपक जलाते समय रखें ये सावधानियां
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दीपक को समतल और आग से सुरक्षित स्थान पर रखें।
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पर्दों, कागज, कपड़ों और ज्वलनशील वस्तुओं से दूर रखें।
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छोटे बच्चों और पालतू जानवरों की पहुंच से दीपक दूर रखें।
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घर से बाहर जाते समय जलते दीपक को बिना निगरानी न छोड़ें।
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अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार पूजा करें; 13 दीपक जलाना हर परिवार के लिए अनिवार्य नियम नहीं है।

