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23 सितंबर से शुक्र अस्त, 37 दिन तक प्रेम और दांपत्य जीवन में आएगी कमी? पंडित नरेंद्र उपाध्याय ने बताया असर
 

23 सितंबर से शुक्र अस्त, 37 दिन तक प्रेम और दांपत्य जीवन में आएगी कमी? पंडित नरेंद्र उपाध्याय ने बताया असर

सितंबर के अंत में शुक्र ग्रह अस्त होने जा रहे हैं। ज्योतिष में शुक्र को विवाह, प्रेम और दांपत्य सुख का कारक माना जाता है। ऐसे में शुक्र के अस्त होने की अवधि को इन विषयों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, इस दौरान दांपत्य जीवन और प्रेम संबंधों में कुछ कमी देखने को मिल सकती है। हालांकि, इसे पूरी तरह नकारात्मक स्थिति नहीं कहा जा सकता।


कालपुरुष की कुंडली में शुक्र का संबंध
पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, कालपुरुष की कुंडली में शुक्र द्वितीय और सप्तम भाव से जुड़े हैं। द्वितीय भाव परिवार और धन का है, जबकि सप्तम भाव विवाह और दांपत्य जीवन का प्रतिनिधित्व करता है। यही वजह है कि शुक्र की स्थिति बदलने पर इन विषयों की चर्चा होती है। शुक्र अस्त होने के दौरान दांपत्य जीवन में सहजता की कमी आ सकती है। पति-पत्नी के बीच आपसी समझ और प्रेम से जुड़े मामलों पर इसका असर पड़ने की ज्योतिषीय मान्यता है। हालांकि, किसी व्यक्ति के जीवन में इसका प्रभाव उसकी कुंडली के अनुसार अलग हो सकता है।

प्रेम जीवन में क्या बदलेगा?
शुक्र अस्त होने पर प्रेम संबंधों में कुछ बदलाव देखने को मिल सकते हैं। रिश्तों में पहले जैसी सहजता नहीं रहने या भावनात्मक जुड़ाव में कमी महसूस होने की बात कही जाती है। इसका मतलब यह नहीं है कि हर प्रेम संबंध में परेशानी आएगी। पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, शुक्र के अस्त होने की अवधि में दांपत्य सुख से जुड़े विषय प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में रिश्तों को लेकर समझ और आपसी संवाद बनाए रखना जरूरी होगा।

हार्मोनल समस्या हो सकती हैं
शुक्र को शारीरिक आकर्षण, दांपत्य सुख और प्रजनन क्षमता से भी जोड़ा जाता है। इसलिए शुक्र अस्त होने पर इन विषयों में कमी हो सकती है। पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, इस अवधि में हार्मोनल समस्याएं हो सकती हैं।


23 सितंबर से 30 अक्टूबर तक शुक्र अस्त
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, शुक्र 23 सितंबर 2026 से अस्त होंगे और 30 अक्टूबर 2026 को उदय होने की बात कही गई है। यह अवधि करीब 37 दिनों की बताई जा रही है। इस दौरान विवाह, प्रेम और दांपत्य जीवन से जुड़े विषयों पर ज्योतिषीय प्रभाव की चर्चा होगी। हालांकि, शुक्र अस्त होने का फल सभी लोगों के लिए एक जैसा नहीं माना जाता। जन्मकुंडली में शुक्र की स्थिति और अन्य ग्रहों के प्रभाव से परिणाम बदल सकते हैं।

शुक्र अस्त: 23 सितंबर 2026
शुक्र उदय: 30 अक्टूबर 2026
अवधि: करीब 37 दिन

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