हिंदू धर्म में वट सावित्री व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। यह व्रत सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए करती हैं। इस वर्ष 16 मई 2026 को वट सावित्री व्रत रखा जाएगा। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर देवी सावित्री और सत्यवान की कृपा प्राप्त होती है।
🪔 वट सावित्री पूजा सामग्री (Puja Samagri List)
व्रत की पूजा के लिए निम्न सामग्री आवश्यक मानी जाती है:
- वट (बरगद) का पेड़
- कच्चा सूत या मौली (कलावा)
- पूजा थाली
- रोली और चंदन
- सिंदूर
- अक्षत (चावल)
- फूल और माला
- धूप और दीपक
- घी या तेल का दीप
- फल (विशेषकर केला)
- मिठाई या नैवेद्य
- जल से भरा कलश
- सुपारी और पान के पत्ते
- नारियल
- पूजा कथा की पुस्तक
🌳 वट सावित्री व्रत कथा (संक्षेप में)
पौराणिक कथा के अनुसार, राजा अश्वपति की पुत्री सावित्री का विवाह सत्यवान से हुआ था। नारद मुनि ने बताया था कि सत्यवान का जीवन बहुत कम है और एक वर्ष के भीतर उनकी मृत्यु हो जाएगी।
जब यमराज सत्यवान के प्राण लेने आए, तो सावित्री अपने पतिव्रता धर्म के बल पर यमराज के पीछे-पीछे चल पड़ीं। उनकी निष्ठा और तपस्या से प्रसन्न होकर यमराज ने उन्हें कई वरदान दिए, और अंत में सत्यवान को पुनः जीवन प्राप्त हुआ।
इसी घटना की स्मृति में वट सावित्री व्रत रखा जाता है।
🪔 आसान पूजा विधि (Step-by-Step)
- सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लें
- सोलह श्रृंगार करके वट वृक्ष के पास जाएं
- वृक्ष को जल अर्पित करें और रोली-चंदन लगाएं
- कच्चा सूत लेकर वट वृक्ष की 7 या 108 परिक्रमा करें
- सावित्री-सत्यवान की कथा का श्रवण करें
- दीप जलाकर आरती करें
- अंत में पति की लंबी उम्र की प्रार्थना करें
🌺 धार्मिक महत्व
मान्यता है कि वट वृक्ष में त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु और महेश) का वास होता है, इसलिए इसकी पूजा अत्यंत शुभ मानी जाती है। यह व्रत सुहागिन महिलाओं के सौभाग्य और वैवाहिक सुख का प्रतीक माना जाता है।

