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कल है परिवर्तिनी एकादशी, डोल ग्यारस पर किसकी करें पूजा, कब से तिथि शुरू, श्रीकृष्ण से क्या है संबंध
 

कल है परिवर्तिनी एकादशी, डोल ग्यारस पर किसकी करें पूजा, कब से तिथि शुरू, श्रीकृष्ण से क्या है संबंध

परिवर्तिनी एकादशी का व्रत इस बार 22 सितंबर 2026, मंगलवार को रखा जाएगा। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की इस एकादशी को परिवर्तिनी एकादशी के अलावा जलझूलनी एकादशी, डोल ग्यारस और पार्श्व एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि 21 सितंबर की रात करीब 8 बजे शुरू होगी और 22 सितंबर की रात करीब 9 बजकर 43 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर एकादशी का व्रत 22 सितंबर को रखा जाएगा।

डोल ग्यारस पर किसकी पूजा करें

परिवर्तिनी एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित मानी जाती है। इस दिन भगवान विष्णु के वामन स्वरूप की पूजा करने की विशेष परंपरा बताई गई है। श्रद्धालु भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाकर पूजा-अर्चना कर सकते हैं। भगवान को फल, फूल, तुलसी और पंचामृत अर्पित किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन व्रत और भगवान विष्णु की आराधना करने से सुख-समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

राजस्थान सहित कई क्षेत्रों में इसे डोल ग्यारस के रूप में भी मनाया जाता है। इस दिन मंदिरों में भगवान के विग्रह को डोली में विराजमान कर शोभायात्रा निकाली जाती है। कई स्थानों पर श्री शालिग्रामजी को डोली में विराजमान कर मंदिर की परिक्रमा कराने की परंपरा भी है। इसके बाद भगवान को पंचामृत का भोग लगाया जाता है।

श्रीकृष्ण से क्या है संबंध

डोल ग्यारस और जलझूलनी एकादशी का संबंध श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से भी जोड़ा जाता है। लोक परंपरा और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद इसी दिन माता यशोदा ने बालकृष्ण का जलवा पूजन किया था। इसके बाद बालकृष्ण को गांव में घुमाने की परंपरा से भी इस पर्व को जोड़ा जाता है। जलवा पूजन को कुछ स्थानों पर कुआं पूजन भी कहा जाता है। इसी वजह से इस दिन को जलझूलनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है।

क्यों कहते हैं परिवर्तिनी एकादशी

धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु जब क्षीरसागर में योगनिद्रा में रहते हैं, तब इस एकादशी के आसपास उनके करवट बदलने की परंपरा मानी जाती है। भगवान विष्णु के करवट परिवर्तन के कारण इसे परिवर्तिनी एकादशी कहा जाता है। इसे पार्श्व एकादशी और वामन एकादशी के नाम से भी जाना जाता है।

कब होगा व्रत का पारण

परिवर्तिनी एकादशी के व्रत का पारण 23 सितंबर 2026, बुधवार को किया जाएगा। उपलब्ध पंचांग विवरण के अनुसार पारण का समय सुबह 6:10 बजे से 8:35 बजे तक बताया गया है। हालांकि पारण का समय स्थान के अनुसार कुछ अलग हो सकता है, इसलिए श्रद्धालुओं को अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार समय देखना चाहिए।

इस दिन भगवान विष्णु के साथ श्रीकृष्ण और शालिग्रामजी की पूजा करने की परंपरा भी कई क्षेत्रों में देखने को मिलती है। डोल ग्यारस पर मंदिरों में विशेष आयोजन होते हैं और भगवान को डोली में विराजमान कर भक्त दर्शन करते हैं।

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