आज एकदंत संकष्टी चतुर्थी, घर से बाहर निकलने से पहले जानिए शुभ योग, मुहूर्त और राहुकाल
आज 16 मई 2025 है, ज्येष्ठ माह का चतुर्थी तिथि है और आज इस माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि है। आज दिन की लंबाई 16 घंटे 35 मिनट 46 सेकंड होगी, जबकि रात की लंबाई 16 घंटे 23 मिनट 40 सेकंड होगी। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, यह ग्रीष्म ऋतु का प्रथम भाग है और सूर्य इस समय उत्तरायण में गोचर कर रहा है। आइए जानते हैं 16 मई को पंचांग के पांचों अंग यानी तिथि, नक्षत्र, वार, योग और करण की स्थिति क्या है? आज का समय आपके लिए कैसा है और राहु काल का समय क्या है?
आज का पंचांग
तिथि: आज ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि है, जो 17 मई को सुबह 05:13 बजे तक रहेगी। इसके बाद ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि शुरू हो जाएगी। चतुर्थी तिथि रिक्ता तिथि है, जिसके स्वामी भगवान गणेश हैं तथा इसका स्वभाव अशुभ है। यह तिथि शुभ मुहूर्त में मान्य नहीं है।
नक्षत्र: आज मूला नक्षत्र शाम 04:07 बजे तक रहेगा। यह एक शुभ नक्षत्र है। इसके बाद पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र शुरू हो जाएगा, यह भी एक शुभ नक्षत्र है।
दिन/वार: आज शुक्रवार देवी लक्ष्मी, दुर्गा, पार्वती, संतोषी माता सहित सभी देवी स्वरूपों और दैत्य गुरु शुक्राचार्य को समर्पित है। यह दिन धन संबंधी उपायों और शुक्र ग्रह की शांति के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है।
योग: आज प्रातः 07:15 बजे तक सिद्ध योग रहेगा, जो एक शुभ योग है। इसके बाद साध्य योग शुरू हो जाएगा।
करण: बव करण आज शाम 04:41 बजे तक रहेगा, उसके बाद बालव करण लगेगा, जो 17 मई को सुबह 05:13 बजे तक रहेगा। इसके बाद कौलव करण आरंभ होगा।
सूर्य-चन्द्र पारगमन
आज के पंचाग के उपरोक्त पांच भागों के साथ-साथ आज सूर्य एवं चन्द्रमा के गोचर की स्थिति इस प्रकार है:
सूर्य गोचर: सूर्य वृषभ राशि में गोचर कर रहा है, जिसका स्वामी शुक्र है।
चन्द्रमा का गोचर: चन्द्रमा धनु राशि में गोचर कर रहा है, जिसका स्वामी बृहस्पति है।
शुभ-अशुभ काल
आज शुभ मुहूर्तों की स्थितियां इस प्रकार रहने के योग हैं:
ब्रह्म मुहूर्त: 04:06 AM से 04:48 AM
प्रातः सन्ध्या: 04:27 AM से 05:30 AM
अभिजित मुहूर्त: 11:50 AM से 12:45 PM
विजय मुहूर्त: 02:34 PM से 03:28 PM
गोधूलि मुहूर्त: 07:04 PM से 07:25 PM
सायाह्न सन्ध्या: 07:06 PM से 08:08 PM
अमृत काल: 09:11 AM से 10:55 AM
निशिता मुहूर्त: 11:57 PM से 12:38 AM, मई 17
आज अशुभ मुहूर्तों की स्थितियां इस प्रकार रहने के योग हैं:
राहुकाल: आज राहु काल 10:36 AM से 12:18 PM तक रहने का योग है। हिन्दू धर्म में इस अवधि में कोई भी शुभ कार्य आरंभ करने की मनाही है।
यमगण्ड: 03:42 PM से 05:24 PM
गुलिक काल: 07:12 AM से 08:54 AM
विष घटी/वर्ज्य काल: 02:23 PM से 04:07 PM और 02:22 AM, मई 17 से 04:04 AM, मई 17
दुर्मुहूर्त काल: 08:13 AM से 09:07 AM और 12:45 PM से 01:39 PM
गण्ड मूल: 05:30 AM से 04:07 PM
16 मई 2025 के त्यौहार एवं उत्सव
आज ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि और दिन शुक्रवार है। आज का दिन देवी लक्ष्मी, दुर्गा, पार्वती, संतोषी माता और सभी देवी स्वरूपों और शुक्र ग्रह को समर्पित माना जाता है। इस दिन मां लक्ष्मी की विशेष पूजा की जाती है, क्योंकि वे धन, वैभव और समृद्धि की अधिष्ठात्री देवी हैं। इसके साथ ही इस दिन मां दुर्गा और मां संतोषी की पूजा और व्रत करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और सुख-शांति मिलती है।
एकदंत संकष्टी चतुर्थी: एकदंत संकष्टी चतुर्थी ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाई जाती है। इस दिन भगवान गणेश की एकदंत रूप में पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस व्रत को रखने से साधक के सभी कष्ट और दुख दूर हो जाते हैं तथा जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
आज की यात्रा टिप्स: आज दिशाशूल पश्चिम दिशा होने के कारण आपातकालीन स्थिति को छोड़कर आज इस दिशा में यात्रा करना शुभ नहीं है।
पंचांग का महत्व
पंचांग केवल तिथियों और त्योहारों का कैलेंडर नहीं है, बल्कि यह जीवन को सफलता और समृद्धि की ओर ले जाने वाला एक महत्वपूर्ण साधन है। यह ब्रह्मांड और आकाशीय घटनाओं की प्राकृतिक लय के साथ सामंजस्य स्थापित करते हुए गति को प्रेरित करता है, जिससे समय और परिस्थितियां अनुकूल बनती हैं।
पंचांग के पांच प्रमुख भाग
पंचांग में पांच मुख्य तत्व होते हैं, जिन्हें ध्यान में रखकर किए गए कार्य में सफलता और समृद्धि की संभावना का पता लगाया जाता है। पंचांग में निम्नलिखित शामिल होते हैं:
वार: यह सप्ताह के सातों दिनों के महत्व और उनके प्रभाव को बताता है।
तिथि: यह चंद्र मास के अनुसार दिनों की गणना दर्शाती है।
नक्षत्र: यह विशिष्ट नक्षत्रों की स्थिति और उनके प्रभावों को दर्शाता है।
योग: यह विशेष खगोलीय संयोगों के महत्व को प्रकट करता है।
करण: आधे दिन के सूचक को करण कहते हैं, जो कार्यों की शुभता को प्रभावित करता है।
शुभ कार्यों में पंचांग का महत्व: हिंदू संस्कृति में शुभ कार्य पंचांग के आधार पर किए जाते हैं, जिससे सकारात्मक ऊर्जा आती है और मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। ये कार्य मुख्यतः हैं: विवाह, गृह प्रवेश, व्यवसाय प्रारंभ करना, यात्रा करना तथा अन्य मांगलिक कार्य।
जीवन में पंचांग की भूमिका: पंचांग न केवल शुभ मुहूर्त जानने का माध्यम है बल्कि यह व्यक्ति की निर्णय लेने की क्षमता को भी मजबूत करता है। यह प्रकृति और ब्रह्मांड की ऊर्जाओं के साथ संतुलन स्थापित करने में मदद करता है, जिससे जीवन में शांति, समृद्धि और सकारात्मकता आती है। इसलिए पंचांग का पालन करके हम अपने जीवन को अधिक सफल और समृद्ध बना सकते हैं।

