इस बार पितृपक्ष में एक दिन हो रहा कम, कौन सी तिथि एक ही दिन, पढ़ें श्राद्ध की तिथियां
पितृपक्ष का समय हिंदू धर्म में पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए विशेष माना जाता है। इस दौरान पितरों की मृत्यु तिथि के अनुसार श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने की परंपरा है। साल 2026 में पितृपक्ष की तिथियों को लेकर खास स्थिति बन रही है। इस बार तिथियों के क्षय के कारण श्राद्ध पक्ष सामान्य 15 दिनों के बजाय 14 दिनों का रहेगा। पितृपक्ष का समापन 10 अक्टूबर 2026 को सर्वपितृ अमावस्या के साथ होगा।
इस बार एक दिन क्यों कम है?
पंचांग गणना के अनुसार इस बार आश्विन कृष्ण पक्ष की एक तिथि का क्षय हो रहा है। इसी वजह से एक दिन में दो तिथियों का श्राद्ध पड़ रहा है और पितृपक्ष की अवधि एक दिन कम हो गई है। उपलब्ध अलग-अलग पंचांग स्रोतों में इस संयोग को लेकर अंतर दिखाई देता है। लाइव हिन्दुस्तान के अनुसार 30 सितंबर को चतुर्थी और पंचमी दोनों तिथियों का श्राद्ध एक ही दिन होगा। वहीं द्रिक पंचांग की गणना में 1 अक्टूबर को पंचमी और षष्ठी दोनों श्राद्ध बताए गए हैं। इसलिए श्राद्ध कर्म करने वाले परिवार अपने स्थानीय पंचांग और पुरोहित की गणना को प्राथमिकता दें।
पितृपक्ष 2026 की श्राद्ध तिथियां
26 सितंबर, शनिवार: पूर्णिमा श्राद्ध
27 सितंबर, रविवार: प्रतिपदा श्राद्ध
28 सितंबर, सोमवार: द्वितीया श्राद्ध
29 सितंबर, मंगलवार: तृतीया श्राद्ध और महाभरणी श्राद्ध
30 सितंबर, बुधवार: चतुर्थी श्राद्ध
1 अक्टूबर, गुरुवार: पंचमी और षष्ठी श्राद्ध
2 अक्टूबर, शुक्रवार: सप्तमी श्राद्ध
3 अक्टूबर, शनिवार: अष्टमी श्राद्ध
4 अक्टूबर, रविवार: नवमी श्राद्ध और मातृ नवमी
5 अक्टूबर, सोमवार: दशमी श्राद्ध
6 अक्टूबर, मंगलवार: एकादशी श्राद्ध
7 अक्टूबर, बुधवार: द्वादशी और मघा श्राद्ध
8 अक्टूबर, गुरुवार: त्रयोदशी श्राद्ध
9 अक्टूबर, शुक्रवार: चतुर्दशी श्राद्ध
10 अक्टूबर, शनिवार: सर्वपितृ अमावस्या।
26 सितंबर को पूर्णिमा श्राद्ध
पितृपक्ष की मुख्य श्राद्ध तिथियां 27 सितंबर से शुरू मानी जा रही हैं, लेकिन 26 सितंबर को पूर्णिमा श्राद्ध किया जाएगा। पूर्णिमा तिथि का श्राद्ध पितृपक्ष से जुड़े कर्मों में अलग महत्व रखता है। इसके बाद 27 सितंबर को प्रतिपदा श्राद्ध से क्रम आगे बढ़ेगा।
29 सितंबर को महाभरणी श्राद्ध
29 सितंबर को तृतीया श्राद्ध के साथ महाभरणी श्राद्ध भी रहेगा। धार्मिक परंपरा में भरणी नक्षत्र से जुड़े श्राद्ध का विशेष महत्व बताया जाता है। इसी तरह 7 अक्टूबर को द्वादशी श्राद्ध के साथ मघा श्राद्ध रहेगा।
10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या
पितृपक्ष का अंतिम दिन 10 अक्टूबर को रहेगा। इसे सर्वपितृ अमावस्या या महालय अमावस्या कहा जाता है। जिन पितरों की मृत्यु तिथि मालूम नहीं हो या किसी कारण से निर्धारित तिथि पर श्राद्ध नहीं किया जा सका हो, उनके लिए इस दिन श्राद्ध और तर्पण करने की परंपरा है।
मृत्यु तिथि के अनुसार करें श्राद्ध
धार्मिक परंपरा के अनुसार जिस तिथि को किसी व्यक्ति का निधन हुआ हो, पितृपक्ष में उसी तिथि पर उनका श्राद्ध किया जाता है। यदि मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं है तो सर्वपितृ अमावस्या का दिन महत्वपूर्ण माना जाता है। श्राद्ध की विधि, मुहूर्त और तिथि की स्थानीय गणना में अंतर हो सकता है, इसलिए अपने शहर के पंचांग के अनुसार समय देखना उचित रहेगा।

