दीवाली पूजन में खील-बताशे चढ़ाने की परंपरा सिर्फ रस्म नहीं! धन और खुशहाली से जुड़े इस गुप्त रहस्य को समझें
दीपावली का त्योहार आते ही घरों में मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। पूजा की थाली में फूल, फल, मिठाई, दीपक के साथ खील और बताशे भी जरूर रखे जाते हैं। आपने भी देखा होगा कि दिवाली पर लक्ष्मी पूजन के दौरान खील-बताशे चढ़ाने की परंपरा वर्षों से चली आ रही है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसके पीछे केवल धार्मिक रस्म ही नहीं, बल्कि धन, समृद्धि और खुशहाली से जुड़ी मान्यताएं भी हैं?
दिवाली पर खील-बताशे क्यों चढ़ाए जाते हैं?
हिंदू धर्म में खील और बताशे को शुभता तथा समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। खील धान से तैयार की जाती है और धान को अन्न एवं समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है। वहीं बताशे चीनी से तैयार होते हैं, जिन्हें मिठास और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है।
धार्मिक मान्यता है कि लक्ष्मी पूजन में खील-बताशे अर्पित करने से घर में अन्न और धन की बरकत बनी रहती है। यह अर्पण मां लक्ष्मी के प्रति आभार व्यक्त करने और परिवार में सुख-समृद्धि की कामना का प्रतीक भी माना जाता है।
खील का धन और खुशहाली से क्या है संबंध?
खील यानी धान को भूनकर तैयार किया गया खाद्य पदार्थ। भारतीय परंपरा में धान को अन्न का महत्वपूर्ण रूप माना गया है। अन्न को जीवन का आधार और देवी अन्नपूर्णा की कृपा का प्रतीक समझा जाता है।
दीपावली पर खील चढ़ाने की परंपरा इस मान्यता से जुड़ी है कि घर में कभी अन्न की कमी न हो और परिवार हमेशा खुशहाल रहे। नई फसल और कृषि संस्कृति से भी इस परंपरा का संबंध माना जाता है।
बताशे क्यों माने जाते हैं शुभ?
बताशे मिठास के प्रतीक हैं। धार्मिक अवसरों और पूजा-पाठ में मीठी चीजें अर्पित करना शुभ माना जाता है। दीपावली पर बताशे चढ़ाने के पीछे यह कामना जुड़ी होती है कि परिवार के सदस्यों के जीवन में मिठास बनी रहे, रिश्तों में प्रेम बढ़े और घर में सुख-शांति का वातावरण रहे।
कई जगहों पर बताशे के साथ खिलौने और अन्य पारंपरिक मिठाइयां भी पूजा में रखी जाती हैं।
लक्ष्मी पूजन के बाद खील-बताशे का क्या करते हैं?
लक्ष्मी-गणेश की पूजा पूरी होने के बाद खील-बताशे को प्रसाद के रूप में परिवार के सदस्यों और आसपास के लोगों में बांटा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, पूजा में अर्पित प्रसाद ग्रहण करने से देवी-देवताओं का आशीर्वाद मिलता है। इसे आपस में बांटना प्रेम, सहयोग और खुशियां साझा करने का प्रतीक भी है।
क्या है इस परंपरा का असली संदेश?
खील-बताशे चढ़ाने की परंपरा हमें अन्न का सम्मान करने, जीवन में मिठास बनाए रखने और अपनी खुशियां दूसरों के साथ बांटने का संदेश देती है। खील जहां अन्न और समृद्धि का प्रतीक है, वहीं बताशे मिठास और प्रसन्नता का प्रतीक माने जाते हैं।
इसलिए दिवाली पर खील-बताशे चढ़ाना केवल एक रस्म नहीं, बल्कि सुखी और समृद्ध जीवन की कामना से जुड़ी सदियों पुरानी परंपरा है।

