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रत्नों का सही नियम: पन्ना, नीलम और मोती पहनने से कैसे बढ़ सकता है असर? जानिए दिन, उंगली और मंत्र

रत्नों का सही नियम: पन्ना, नीलम और मोती पहनने से कैसे बढ़ सकता है असर? जानिए दिन, उंगली और मंत्र

रत्न शास्त्र में माना जाता है कि पन्ना, नीलम, मोती जैसे रत्न केवल आभूषण नहीं होते, बल्कि ये ग्रहों की ऊर्जा से जुड़े हुए प्रभावशाली माध्यम भी माने जाते हैं। परंपरागत मान्यताओं के अनुसार यदि इन्हें सही नियम, सही दिन और सही उंगली में धारण किया जाए, तो इनका प्रभाव अधिक सकारात्मक हो सकता है।

Astrology में रत्नों को विभिन्न ग्रहों से जोड़ा जाता है, और प्रत्येक रत्न का संबंध किसी विशेष ग्रह की ऊर्जा से माना जाता है।

1. पन्ना (Emerald) – बुध ग्रह का रत्न

पन्ना को बुद्धि, व्यापार और संवाद क्षमता से जोड़ा जाता है।

  • दिन: बुधवार
  • उंगली: छोटी उंगली (कनिष्ठिका)
  • मंत्र: “ॐ बुं बुधाय नमः”

मान्यता है कि इसे सही नियम से पहनने पर निर्णय क्षमता और संचार कौशल बेहतर हो सकता है।

2. नीलम (Blue Sapphire) – शनि ग्रह का रत्न

नीलम को सबसे शक्तिशाली और तेज प्रभाव वाला रत्न माना जाता है।

  • दिन: शनिवार
  • उंगली: मध्यमा (मिडिल फिंगर)
  • मंत्र: “ॐ शं शनैश्चराय नमः”

कहा जाता है कि यह रत्न भाग्य, कर्म और अनुशासन से जुड़ा प्रभाव देता है, लेकिन इसे पहनने से पहले सावधानी जरूरी मानी जाती है।

3. मोती (Pearl) – चंद्र ग्रह का रत्न

मोती को मन, शांति और भावनाओं से जोड़ा जाता है।

  • दिन: सोमवार
  • उंगली: छोटी उंगली या अनामिका (परंपरा अनुसार भिन्नता हो सकती है)
  • मंत्र: “ॐ सोम सोमाय नमः”

मान्यता है कि यह मानसिक शांति और भावनात्मक संतुलन बनाए रखने में मदद करता है।

रत्न पहनने से पहले जरूरी सावधानियां

रत्न धारण करने से पहले कुंडली का विश्लेषण करना अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि हर रत्न हर व्यक्ति के लिए उपयुक्त नहीं होता। गलत रत्न धारण करने से अपेक्षित परिणाम न मिलने की बात भी कही जाती है।

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