सावन 2026 में लगेंगे साल के आखिरी सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण, जानें तारीख, समय और धार्मिक महत्व
सनातन धर्म में सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए बेहद पवित्र माना जाता है। इस पूरे महीने भक्त व्रत, पूजा और जलाभिषेक करके भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। लेकिन साल 2026 का सावन और भी खास रहने वाला है, क्योंकि इसी पावन महीने में साल के आखिरी चंद्रग्रहण और सूर्यग्रहण लगने जा रहे हैं।
ज्योतिषीय दृष्टि से ग्रहण की घटनाओं को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। खासकर जब ग्रहण अमावस्या और पूर्णिमा तिथि पर पड़ें, तो उनका धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व और बढ़ जाता है। माना जा रहा है कि सावन में पड़ने वाले ये ग्रहण कई राशियों और देश-दुनिया पर विशेष प्रभाव डाल सकते हैं।
कब लगेगा चंद्रग्रहण?
साल 2026 का आखिरी चंद्रग्रहण सावन महीने की पूर्णिमा तिथि पर लगेगा। यह ग्रहण 28 अगस्त 2026 को पड़ने वाला है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार यह ग्रहण देर रात शुरू होगा और कई घंटों तक रहेगा। चंद्रग्रहण के दौरान चंद्रमा पर पृथ्वी की छाया पड़ती है, जिससे उसका प्रकाश कुछ समय के लिए धुंधला या लाल दिखाई देने लगता है। धार्मिक मान्यताओं में इसे महत्वपूर्ण खगोलीय घटना माना जाता है।
सूर्यग्रहण कब लगेगा?
वहीं साल का आखिरी सूर्यग्रहण सावन अमावस्या के दिन लगेगा। यह ग्रहण 12 अगस्त 2026 को पड़ने जा रहा है। सूर्यग्रहण तब होता है जब चंद्रमा, पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है और सूर्य का प्रकाश आंशिक या पूर्ण रूप से ढक जाता है।ज्योतिष शास्त्र में सूर्यग्रहण को विशेष प्रभावकारी माना गया है। कई लोग इस दौरान पूजा-पाठ और मंत्र जाप करते हैं।
क्या भारत में दिखाई देंगे ये ग्रहण?
खगोलविदों के अनुसार हर ग्रहण हर देश में दिखाई नहीं देता। ग्रहण की दृश्यता स्थान और समय पर निर्भर करती है। अगर कोई ग्रहण भारत में दिखाई देता है, तभी उसका सूतक काल मान्य माना जाता है। हालांकि ग्रहण को लेकर आधिकारिक खगोलीय जानकारी समय के करीब जारी की जाती है। इसलिए लोग ग्रहण की दृश्यता और समय की पुष्टि पंचांग या खगोलीय संस्थाओं से करते हैं।
ग्रहण का धार्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण के समय वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ जाती है। इसलिए इस दौरान पूजा-पाठ, मंत्र जाप और भगवान का ध्यान करना शुभ माना जाता है। सावन में ग्रहण लगना विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यह महीना भगवान शिव को समर्पित होता है। मान्यता है कि ग्रहण काल में महामृत्युंजय मंत्र और शिव मंत्रों का जाप करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है। कई श्रद्धालु ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान और दान भी करते हैं।
ग्रहण के दौरान किन बातों का रखें ध्यान?
धार्मिक ग्रंथों में ग्रहण के समय कुछ सावधानियां बरतने की सलाह दी गई है—
- ग्रहण के दौरान भोजन बनाने और खाने से बचें
- मंदिर के कपाट बंद रखे जाते हैं
- गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है
- ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान करना शुभ माना जाता है
- घर में गंगाजल का छिड़काव किया जाता है
हालांकि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से ग्रहण एक सामान्य खगोलीय प्रक्रिया है, लेकिन धार्मिक परंपराओं में इसका विशेष महत्व बना हुआ है।
क्यों खास माना जा रहा है सावन 2026?
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार सावन के पवित्र महीने में सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण का पड़ना दुर्लभ संयोग माना जा रहा है। यही वजह है कि धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से यह समय काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। श्रद्धालु इस दौरान भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना कर आध्यात्मिक लाभ प्राप्त करने की कोशिश करेंगे।

