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मई का आखिरी प्रदोष व्रत 28 मई को, गुरु प्रदोष पर भगवान शिव की पूजा से दूर होता है भय और बढ़ती है समृद्धि

मई का आखिरी प्रदोष व्रत 28 मई को, गुरु प्रदोष पर भगवान शिव की पूजा से दूर होता है भय और बढ़ती है समृद्धि

मई का आखिरी प्रदोष व्रत 28 मई को है जिसे गुरु प्रदोष व्रत के नाम से जाना जाएगा। इस दिन भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा करने से भय दूर होता है और सुख समृद्धि बढ़ती है।

हिंदू पंचांग के अनुसार इस वर्ष मई माह का अंतिम प्रदोष व्रत 28 मई 2026 को मनाया जाएगा। यह व्रत गुरुवार के दिन पड़ने के कारण इसे गुरु प्रदोष व्रत कहा जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की विधिवत पूजा करने से जीवन में सुख शांति और समृद्धि का वास होता है।

प्रदोष व्रत को भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और शिवलिंग पर जलाभिषेक करने से सभी प्रकार के भय और संकट दूर होते हैं तथा मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।

गुरुवार के दिन पड़ने वाले प्रदोष व्रत को विशेष फलदायी माना जाता है। धार्मिक परंपराओं के अनुसार इस दिन की गई पूजा से गुरु ग्रह का प्रभाव भी शुभ होता है जिससे जीवन में ज्ञान धन और सौभाग्य की वृद्धि होती है।

भक्तजन इस दिन उपवास रखते हैं और संध्या काल में भगवान शिव माता पार्वती और नंदी की पूजा करते हैं। मंदिरों में विशेष आरती और अभिषेक का आयोजन भी किया जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुरु प्रदोष व्रत करने से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। व्यक्ति के जीवन से भय दूर होता है और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। साथ ही परिवार में सुख शांति और आर्थिक स्थिरता आने की भी मान्यता है।

प्रदोष व्रत हिंदू धर्म में हर महीने दो बार आता है और शिव भक्तों के लिए यह विशेष महत्व रखता है। इस दिन श्रद्धालु व्रत रखकर भगवान शिव से अपने जीवन की बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना करते हैं।

28 मई 2026 को पड़ने वाला गुरु प्रदोष व्रत शिव भक्तों के लिए विशेष आध्यात्मिक महत्व रखता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और भक्ति के साथ की गई पूजा से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं और सुख समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।

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