हर साल की तरह इस बार भी देशभर में दिवाली को लेकर उत्साह अभी से देखने को मिलने लगा है। जैसे-जैसे त्योहार नजदीक आता है, घरों में साफ-सफाई शुरू हो जाती है, बाजारों में रौनक बढ़ जाती है और हर ओर रोशनी व सजावट का माहौल बन जाता है। दिवाली सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि खुशियों, समृद्धि और नई शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।
साल 2026 में दिवाली 8 नवंबर, रविवार को मनाई जाएगी। यह दिन विशेष रूप से इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि रविवार होने के कारण लोग परिवार के साथ अधिक समय बिताकर त्योहार को पूरे उत्साह से मना सकेंगे। दिवाली की मुख्य रात्रि को मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की विधिवत पूजा की जाती है, जिससे घर में सुख-समृद्धि और धन-वैभव की प्राप्ति होती है।
दिवाली के दौरान घरों को दीपों, मोमबत्तियों और रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन मां लक्ष्मी पृथ्वी पर आती हैं और साफ-सुथरे व रोशनी से सजे घरों में वास करती हैं। इसी कारण लोग अपने घरों को विशेष रूप से स्वच्छ और सुंदर बनाते हैं।
बाजारों में इस समय जबरदस्त चहल-पहल देखने को मिलती है। कपड़े, मिठाइयों, सजावट के सामान और इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं की खरीदारी में तेजी आ जाती है। बच्चे और बड़े सभी इस पर्व का बेसब्री से इंतजार करते हैं, खासकर पटाखों और मिठाइयों के लिए।
दिवाली पूजा का महत्व
दिवाली की शाम मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि भगवान गणेश विघ्नों को दूर करते हैं और मां लक्ष्मी घर में धन-धान्य का आशीर्वाद देती हैं। पूजा के दौरान दीप जलाकर घर के हर कोने में रोशनी की जाती है, जो अंधकार पर प्रकाश और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।
दिवाली से जुड़ी परंपराएं
दिवाली से पहले धनतेरस और छोटी दिवाली मनाई जाती है, जबकि बाद में गोवर्धन पूजा और भाई दूज का आयोजन होता है। यह पूरा त्योहार श्रृंखला के रूप में परिवार और समाज को जोड़ने का काम करता है।
कुल मिलाकर, दिवाली 2026 एक बार फिर खुशियों, उमंग और नई ऊर्जा का संदेश लेकर आएगी। यह पर्व न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, जो लोगों के जीवन में रोशनी और सकारात्मकता भर देता है।

