Samachar Nama
×

Surya chalisa path: रथ सप्तमी पर जरूर पढ़ें सूर्य चालीसा, भगवान सूर्यदेव की बनी रहेगी कृपा

हिंदू धर्म में पूजा पाठ को खास महत्व दिया जाता हैं वही सूर्य देव की पूजा करते समय सूर्य चालीसा का पाठ करना उत्तम माना जाता हैं सूर्य चालीसा का पाठ करने से सूर्य देवता प्रसन्न हो जाते हैं इस साल रथ सप्तमी या अचला सप्तमी या सूर्य जयंती 19 फरवरी दिन शुक्रवार को हैं
Surya chalisa path: रथ सप्तमी पर जरूर पढ़ें सूर्य चालीसा, भगवान सूर्यदेव की बनी रहेगी कृपा

हिंदू धर्म में पूजा पाठ को खास महत्व दिया जाता हैं वही सूर्य देव की पूजा करते समय सूर्य चालीसा का पाठ करना उत्तम माना जाता हैं सूर्य चालीसा का पाठ करने से सूर्य देवता प्रसन्न हो जाते हैं इस साल रथ सप्तमी या अचला सप्तमी या सूर्य जयंती 19 फरवरी दिन शुक्रवार को हैंSurya chalisa path: रथ सप्तमी पर जरूर पढ़ें सूर्य चालीसा, भगवान सूर्यदेव की बनी रहेगी कृपा इस दिन व्रत रखने और नियम से पूजा करने पर धन, आरोग्य और संतान की प्राप्ति होती हैं। सूर्य चालीसा का पाठ रथ सप्तमी के दिन करने से लाभ की प्राप्ति हो सकती हैंSurya chalisa path: रथ सप्तमी पर जरूर पढ़ें सूर्य चालीसा, भगवान सूर्यदेव की बनी रहेगी कृपा रथ सप्तमी हर साल माघ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को होती हैं तो आज हम आपके लिए लेकर आए हैं सूर्य चालीसा पाठ, तो आइए जानते हैं।Surya chalisa path: रथ सप्तमी पर जरूर पढ़ें सूर्य चालीसा, भगवान सूर्यदेव की बनी रहेगी कृपा

यहां पढ़ें सूर्य चालीसा का पाठ—

जय सविता जय जयति दिवाकर, सहस्रांशु सप्ताश्व तिमिरहर।

भानु, पतंग, मरीची, भास्कर, सविता, हंस, सुनूर, विभाकर।।

विवस्वान, आदित्य, विकर्तन, मार्तण्ड, हरिरूप, विरोचन।

अंबरमणि, खग, रवि कहलाते, वेद हिरण्यगर्भ कह गाते।।

सहस्रांशु, प्रद्योतन, कहि कहि, मुनिगन होत प्रसन्न मोदलहि।

अरुण सदृश सारथी मनोहर, हांकत हय साता चढ़‍ि रथ पर।।

मंडल की महिमा अति न्यारी, तेज रूप केरी बलिहारी।

उच्चैश्रवा सदृश हय जोते, देखि पुरन्दर लज्जित होते।।

मित्र, मरीचि, भानु, अरुण, भास्कर, सविता,

सूर्य, अर्क, खग, कलिहर, पूषा, रवि,

आदित्य, नाम लै, हिरण्यगर्भाय नमः कहिकै।

द्वादस नाम प्रेम सो गावैं, मस्तक बारह बार नवावै।।

चार पदारथ सो जन पावै, दुख दारिद्र अघ पुंज नसावै।

नमस्कार को चमत्कार यह, विधि हरिहर कौ कृपासार यह।।

सेवै भानु तुमहिं मन लाई, अष्टसिद्धि नवनिधि तेहिं पाई।

बारह नाम उच्चारन करते, सहस जनम के पातक टरते।।

उपाख्यान जो करते तवजन, रिपु सों जमलहते सोतेहि छन।

छन सुत जुत परिवार बढ़तु है, प्रबलमोह को फंद कटतु है।।

अर्क शीश को रक्षा करते, रवि ललाट पर नित्य बिहरते।

सूर्य नेत्र पर नित्य विराजत, कर्ण देश पर दिनकर छाजत।।

भानु नासिका वास करहु नित, भास्कर करत सदा मुख कौ हित।

ओठ रहैं पर्जन्य हमारे, रसना बीच तीक्ष्ण बस प्यारे।।

कंठ सुवर्ण रेत की शोभा, तिग्मतेजसः कांधे लोभा।

पूषा बाहु मित्र पीठहिं पर, त्वष्टा-वरुण रहम सुउष्णकर।।

युगल हाथ पर रक्षा कारन, भानुमान उरसर्मं सुउदरचन।

बसत नाभि आदित्य मनोहर, कटि मंह हंस, रहत मन मुदभर।।

जंघा गोपति, सविता बासा, गुप्त दिवाकर करत हुलासा।

विवस्वान पद की रखवारी, बाहर बसते नित तम हारी।।

सहस्रांशु, सर्वांग सम्हारै, रक्षा कवच विचित्र विचारे।

अस जोजजन अपने न माहीं, भय जग बीज करहुं तेहि नाहीं।।

दरिद्र कुष्ट तेहिं कबहुं न व्यापै, जोजन याको मन मंह जापै।

अंधकार जग का जो हरता, नव प्रकाश से आनन्द भरता।।

ग्रह गन ग्रसि न मिटावत जाही, कोटि बार मैं प्रनवौं ताही।

मन्द सदृश सुतजग में जाके, धर्मराज सम अद्भुत बांके।।

धन्य-धन्य तुम दिनमनि देवा, किया करत सुरमुनि नर सेवा।

भक्ति भावयुत पूर्ण नियम सों, दूर हटत सो भव के भ्रम सों।।

परम धन्य सो नर तनधारी, हैं प्रसन्न जेहि पर तम हारी।

अरुण माघ महं सूर्य फाल्गुन, मध वेदांगनाम रवि उदय।।

भानु उदय वैसाख गिनावै, ज्येष्ठ इन्द्र आषाढ़ रवि गावै।

यम भादों आश्विन हिमरेता, कातिक होत दिवाकर नेता।।

अगहन भिन्न विष्णु हैं पूसहिं, पुरुष नाम रवि हैं मलमासहिं।Surya chalisa path: रथ सप्तमी पर जरूर पढ़ें सूर्य चालीसा, भगवान सूर्यदेव की बनी रहेगी कृपा

 

Share this story