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पितृ पक्ष में इंदिरा एकादशी का विशेष महत्व: जानें पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और पूर्वजों के मोक्ष की पौराणिक कथा

पितृ पक्ष में इंदिरा एकादशी का विशेष महत्व: जानें पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और पूर्वजों के मोक्ष की पौराणिक कथा

हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। सालभर में कुल 24 एकादशियां आती हैं और हर एकादशी का अपना अलग महत्व बताया गया है। इन्हीं में से एक है इंदिरा एकादशी, जिसे भगवान विष्णु की आराधना के साथ-साथ पितरों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इंदिरा एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा करने के साथ पितरों का श्राद्ध और तर्पण करने का भी विधान है। माना जाता है कि ऐसा करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। हालांकि, इस बार इंदिरा एकादशी की तारीख को लेकर लोगों के बीच भ्रम बना हुआ है। ऐसे में आइए जानते हैं कि इंदिरा एकादशी का व्रत किस दिन रखा जाएगा और पूजा के लिए कौन सा समय शुभ रहेगा।

6 अक्टूबर को रखा जाएगा इंदिरा एकादशी का व्रत

पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि की शुरुआत 6 अक्टूबर की रात 2 बजकर 7 मिनट से होगी और इसका समापन 7 अक्टूबर की रात 12 बजकर 34 मिनट पर होगा।

उदया तिथि के आधार पर इंदिरा एकादशी का व्रत 6 अक्टूबर को रखा जाएगा। ऐसे में व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं को इसी तारीख के अनुसार पूजा-पाठ और व्रत की तैयारी करनी चाहिए।

पूजा के लिए ये मुहूर्त रहेंगे खास

इंदिरा एकादशी के दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 46 मिनट से दोपहर 12 बजकर 33 मिनट तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान पूजा-पाठ और अन्य शुभ कार्य किए जा सकते हैं।

इसके अलावा सुबह 6 बजकर 17 मिनट से रात 10 बजकर 17 मिनट तक सर्वार्थ सिद्धि योग रहने की बात कही गई है। धार्मिक मान्यता में इस योग को शुभ कार्यों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

भगवान विष्णु के साथ पितरों का करें स्मरण

इंदिरा एकादशी की खासियत यह भी है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा के साथ पितरों के लिए श्राद्ध और तर्पण करने का विधान बताया गया है।

मान्यता है कि इस दिन पितरों का विधिपूर्वक स्मरण और तर्पण करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त हो सकता है। साथ ही जरूरतमंद लोगों को अपनी सामर्थ्य के अनुसार भोजन, वस्त्र या धन का दान करना भी शुभ माना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसा करने से पितरों से जुड़ी परेशानियों और पितृ दोष के प्रभाव को कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, ये धार्मिक मान्यताएं हैं और इनके फल को लेकर अलग-अलग परंपराओं में अलग मत मिलते हैं।

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