भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और प्रथम पूज्य देवता माना जाता है। किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत भगवान गणेश के स्मरण से करने की परंपरा है। गणेशाष्टकम भगवान गणेश की स्तुति का एक प्रसिद्ध पाठ है। श्रद्धालु इसका पाठ गणेश जी की कृपा, सुख शांति और कार्यों में सफलता की कामना से करते हैं।
श्री गणेशाष्टकम्
एकदन्तं महाकायं लम्बोदरगजाननम्।
विघ्ननाशकरं देवं हेरम्बं प्रणमाम्यहम्॥
विघ्नेश्वराय वरदाय सुरप्रियाय
लम्बोदराय सकलाय जगद्धिताय।
नागाननाय श्रुतियज्ञविभूषिताय
गौरीसुताय गणनाथ नमो नमस्ते॥
भक्तार्तिहारिणे देवाय सर्वसिद्धिप्रदायिने।
बुद्धिप्रदाय हेरम्बाय नमस्तुभ्यं विनायक॥
गजाननं भूतगणादिसेवितं
कपित्थजम्बूफलचारुभक्षणम्।
उमासुतं शोकविनाशकारणं
नमामि विघ्नेश्वरपादपंकजम्॥
अगजाननपद्मार्कं गजाननमहर्निशम्।
अनेकदन्तं भक्तानामेकदन्तमुपास्महे॥
सर्वकार्येषु सर्वदा
सर्वविघ्नविनाशनम्।
सर्वसिद्धिप्रदं देवं
वन्देऽहं गणनायकम्॥
गणेशं पूजयेद्भक्त्या
दूर्वाकुसुमचन्दनैः।
मोदकैः फलनैवेद्यैः
सन्तुष्टो भवतु प्रभुः॥
नमस्ते गणनाथाय
नमस्ते विघ्ननाशिने।
नमस्ते गौरीपुत्राय
नमस्ते गणनायक॥
श्री गणेश जी की आरती और मंत्र जाप के बाद गणेशाष्टकम का पाठ करना भी श्रद्धालु शुभ मानते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार बुधवार और गणेश चतुर्थी के दिन इसका पाठ विशेष फलदायी माना जाता है।

