Shivratri Vrat Katha: पवित्र शिवरात्रि व्रत कथा, सुपरफास्ट शिवरात्रि कथा सुनने से मिलेगा भोलेनाथ का आशीर्वाद
महाशिवरात्रि भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना का विशेष पर्व है। इस दिन श्रद्धालु व्रत रखते हैं, शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं और रात में जागरण कर भगवान शिव की पूजा करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार शिवरात्रि व्रत कथा का श्रवण करने से भक्त को भगवान भोलेनाथ की कृपा प्राप्त होती है।
शिवरात्रि व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार एक बार माता पार्वती ने भगवान शिव से पूछा कि ऐसा कौन सा व्रत है, जिससे मनुष्य को सांसारिक कष्टों से मुक्ति मिल सकती है और भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। तब भगवान शिव ने उन्हें शिवरात्रि व्रत का महत्व बताया।एक अन्य प्रसिद्ध कथा में एक शिकारी का वर्णन मिलता है। एक दिन वह शिकार की तलाश में जंगल गया, लेकिन उसे कोई शिकार नहीं मिला। रात होने पर वह एक बेल वृक्ष पर चढ़कर बैठ गया। नीचे एक शिवलिंग था, जिसके बारे में उसे जानकारी नहीं थी।
रात में जागते रहने के दौरान शिकारी पेड़ से एक-एक करके बेलपत्र तोड़कर नीचे गिराता रहा। उसके पास रखा पानी भी धीरे-धीरे नीचे टपकता रहा। इस तरह अनजाने में ही शिवलिंग पर जल और बेलपत्र अर्पित होते रहे।सुबह होने तक शिकारी ने रातभर जागरण किया और भगवान शिव की पूजा भी अनजाने में पूरी हो गई। धार्मिक मान्यता के अनुसार उसके इस अनजाने व्रत और पूजा से भगवान शिव प्रसन्न हुए और उसे आशीर्वाद दिया। इस कथा से यह संदेश मिलता है कि भगवान शिव अपने भक्तों की सच्ची श्रद्धा और भाव को महत्व देते हैं। शिवरात्रि पर व्रत, जागरण और शिव पूजा को इसी कारण विशेष फलदायी माना जाता है।
शिवरात्रि पर क्या करें?
शिवरात्रि के दिन सुबह स्नान करके भगवान शिव का ध्यान करें। शिवलिंग पर जल और बेलपत्र अर्पित करें। ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करें और श्रद्धापूर्वक शिवरात्रि व्रत कथा सुनें या पढ़ें। शाम को शिव आरती करें और संभव हो तो रात्रि में शिव मंदिर जाकर पूजा-अर्चना करें।

