शारदीय नवरात्रि 2026: 11 अक्टूबर से शुरू होंगे मां दुर्गा के नवरात्र, हाथी पर आएंगी माता, जानें कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्रि का विशेष महत्व माना जाता है। नौ दिनों तक चलने वाले इस पर्व में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। भक्त पूरे श्रद्धाभाव से व्रत रखते हैं और विधि-विधान से माता की आराधना करते हैं। साल 2026 में शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर से होने जा रही है। इस बार नवरात्रि के आगमन और प्रस्थान को लेकर भी विशेष ज्योतिषीय मान्यता बताई जा रही है।
मान्यता के अनुसार इस बार मां दुर्गा का आगमन हाथी पर होगा, जबकि माता का प्रस्थान घोड़े पर माना जा रहा है। नवरात्रि के दौरान माता के वाहन को लेकर अलग-अलग मान्यताएं प्रचलित हैं और इनके आधार पर देश-दुनिया में होने वाली घटनाओं को लेकर ज्योतिषीय आकलन भी किया जाता है।
हाथी पर मां दुर्गा का आगमन
धार्मिक मान्यताओं में हाथी को सुख, समृद्धि, स्थिरता और वैभव का प्रतीक माना जाता है। इसी वजह से नवरात्रि में माता का हाथी पर आगमन शुभ संकेत के रूप में देखा जाता है। भक्तों के बीच ऐसी मान्यता है कि देवी के इस वाहन से आगमन के कारण सुख-समृद्धि और शांति का वातावरण बन सकता है।
हालांकि, माता के वाहन से जुड़े ये फल धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित होते हैं। इन्हें वैज्ञानिक भविष्यवाणी नहीं माना जाता।
घोड़े पर होगा माता का प्रस्थान
इस बार नवरात्रि के समापन पर मां दुर्गा का प्रस्थान घोड़े पर माना जा रहा है। ज्योतिषीय परंपराओं में घोड़े को गति और सक्रियता का प्रतीक माना जाता है। माता के प्रस्थान के वाहन के आधार पर भी अलग-अलग तरह की मान्यताएं बताई जाती हैं।
कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
शारदीय नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना को विशेष महत्व दिया जाता है। दिए गए पंचांग विवरण के अनुसार 11 अक्टूबर 2026 को कलश स्थापना के लिए सुबह 6:19 बजे से 10:12 बजे तक शुभ मुहूर्त रहेगा।
इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:49 बजे से दोपहर 12:37 बजे तक रहेगा। इस दौरान भी कलश स्थापना और देवी पूजा की जा सकती है।
कलश स्थापना को नवरात्रि पूजा की शुरुआत का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। घर में साफ-सफाई करने के बाद पूजा स्थल को तैयार किया जाता है और विधि-विधान से कलश स्थापित कर मां दुर्गा की पूजा शुरू की जाती है।
नवरात्रि में होगी मां के नौ रूपों की पूजा
नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार व्रत रखते हैं, दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं और सुबह-शाम माता की आरती करते हैं। नौवें दिन कन्या पूजन के साथ कई परिवारों में नवरात्रि व्रत का समापन किया जाता है।
11 अक्टूबर से शुरू होने वाली शारदीय नवरात्रि को लेकर भक्तों में उत्साह है। कलश स्थापना के लिए शुभ समय सुबह 6:19 से 10:12 बजे तक बताया गया है, जबकि अभिजीत मुहूर्त 11:49 से 12:37 बजे तक रहेगा। अलग-अलग शहरों में सूर्योदय और पंचांग के अनुसार मुहूर्त में थोड़ा अंतर हो सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग के समय को प्राथमिकता देना उचित रहेगा।

