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शनि जयंती और वट सावित्री का महासंयोग: जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र और आरती, मिलेगा विशेष फल

शनि जयंती और वट सावित्री का महासंयोग: जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र और आरती, मिलेगा विशेष फल

इस वर्ष 16 मई को एक अत्यंत दुर्लभ और शुभ महासंयोग बन रहा है, जब शनि जयंती और वट सावित्री व्रत एक ही दिन पड़ रहे हैं। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह संयोग धार्मिक दृष्टि से बेहद शक्तिशाली माना जाता है और इसका प्रभाव जीवन के कई क्षेत्रों जैसे करियर, धन, स्वास्थ्य और वैवाहिक सुख पर देखने को मिल सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि शनि देव और वट सावित्री व्रत का यह संयुक्त प्रभाव साधकों के लिए विशेष फलदायी साबित हो सकता है। एक ओर जहां शनि जयंती कर्म और न्याय से जुड़ी ऊर्जा देती है, वहीं वट सावित्री व्रत सौभाग्य और अखंड वैवाहिक जीवन का प्रतीक माना जाता है।

शुभ मुहूर्त
ज्योतिषियों के अनुसार इस दिन अमावस्या तिथि और शनिवार का संयोग इसे और भी महत्वपूर्ण बना देता है। हालांकि सटीक शुभ मुहूर्त स्थान और पंचांग के अनुसार भिन्न हो सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा का समय देखना उचित रहेगा। दिनभर का समय शनि उपासना और वट वृक्ष पूजा के लिए उपयुक्त माना गया है।

पूजा विधि
इस दिन श्रद्धालु प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करते हैं। शनि देव की पूजा में काले तिल, सरसों का तेल, काले वस्त्र और लोहे से जुड़े दान का विशेष महत्व बताया गया है। शनि मंदिर में दीपक जलाकर शनि चालीसा का पाठ किया जाता है।

वहीं वट सावित्री व्रत में महिलाएं वट वृक्ष की पूजा करती हैं, कच्चा सूत लपेटती हैं और सावित्री-सत्यवान की कथा सुनती हैं। यह व्रत पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए किया जाता है।

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