Sawan Shiv Puran Katha: जब भस्मासुर को वरदान देकर खुद संकट में फंस गए भगवान शिव, जानें पूरी कहानी
सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति के लिए विशेष माना जाता है। इस दौरान भक्त भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं और उनकी पूजा-अर्चना करते हैं। शिव पुराण और अन्य पौराणिक कथाओं में भगवान शिव से जुड़ी कई रोचक कहानियों का वर्णन मिलता है। ऐसी ही एक प्रसिद्ध कथा भस्मासुर की है, जिसमें भगवान शिव अपने ही दिए वरदान के कारण संकट में पड़ गए थे।
भस्मासुर ने की भगवान शिव की कठोर तपस्या
पौराणिक कथा के अनुसार, भस्मासुर नाम का एक असुर भगवान शिव का बहुत बड़ा भक्त था। वह भगवान शिव को प्रसन्न करके एक ऐसा वरदान प्राप्त करना चाहता था, जिससे वह बेहद शक्तिशाली बन सके।
भस्मासुर ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कठोर तपस्या शुरू कर दी। उसकी तपस्या इतनी कठिन थी कि भगवान शिव प्रसन्न होकर उसके सामने प्रकट हुए। महादेव ने भस्मासुर से वरदान मांगने को कहा।
मांगा ऐसा वरदान, जिससे बढ़ गई परेशानी
भस्मासुर ने भगवान शिव से वरदान मांगा कि वह जिस भी व्यक्ति के सिर पर अपना हाथ रखे, वह तुरंत भस्म हो जाए। भगवान शिव अपने भक्तों की भक्ति से जल्दी प्रसन्न होने वाले देवता माने जाते हैं। उन्होंने भस्मासुर को उसकी इच्छा के अनुसार वरदान दे दिया।
लेकिन वरदान मिलते ही भस्मासुर के मन में अहंकार पैदा हो गया। उसे अपनी शक्ति पर घमंड हो गया और उसने सोचा कि अब वह किसी को भी आसानी से भस्म कर सकता है।
भगवान शिव को ही बनाने लगा निशाना
वरदान मिलने के बाद भस्मासुर की नीयत बदल गई। पौराणिक कथा के अनुसार, वह भगवान शिव को ही अपने वरदान की शक्ति से भस्म करने की कोशिश करने लगा। भस्मासुर भगवान शिव के पीछे दौड़ पड़ा।
भगवान शिव के सामने अब एक कठिन परिस्थिति पैदा हो गई थी। अपने भक्त को दिया हुआ वरदान वापस लेना संभव नहीं था। इसलिए महादेव वहां से निकल गए और भगवान विष्णु की सहायता की आवश्यकता पड़ी।
मोहिनी रूप में आए भगवान विष्णु
भस्मासुर को रोकने के लिए भगवान विष्णु ने मोहिनी का रूप धारण किया। मोहिनी के रूप से भस्मासुर इतना प्रभावित हुआ कि वह उनके पीछे जाने लगा।
मोहिनी ने भस्मासुर के सामने नृत्य करना शुरू किया। भस्मासुर भी उनके नृत्य की नकल करने लगा। नृत्य करते-करते मोहिनी ने अपने सिर पर हाथ रखा। भस्मासुर ने भी बिना सोचे अपने सिर पर हाथ रख दिया।
जैसे ही उसने अपने सिर पर हाथ रखा, भगवान शिव से मिले वरदान के कारण वह स्वयं ही भस्म हो गया।
कथा से क्या मिलती है सीख?
भस्मासुर की यह पौराणिक कथा अहंकार के नुकसान की सीख देती है। भस्मासुर को अपनी शक्ति पर इतना घमंड हो गया कि उसने विवेक खो दिया और अंत में उसी शक्ति का शिकार बन गया।
इस कथा का संदेश है कि शक्ति और सफलता मिलने के बाद भी व्यक्ति को अहंकार से बचना चाहिए। वरदान, सामर्थ्य या उपलब्धि तभी सार्थक होती है जब उसका इस्तेमाल सही उद्देश्य के लिए किया जाए।
सावन में क्यों खास है शिव कथा?
सावन में भगवान शिव की पूजा के साथ उनकी कथाओं का श्रवण और पाठ करने की भी परंपरा है। भक्त इस दौरान शिव महिमा, शिव पुराण और भगवान शिव से जुड़ी पौराणिक कथाएं सुनते हैं। मान्यता है कि भगवान शिव का स्मरण करने और उनकी भक्ति करने से मन को शांति मिलती है।

