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Sawan Pradosh Vrat 2026: सावन में पड़ेंगे दो प्रदोष व्रत, 10 अगस्त को सोम प्रदोष और 25 अगस्त को भौम प्रदोष; जानें पूजा विधि और महत्व

Sawan Pradosh Vrat 2026: सावन में पड़ेंगे दो प्रदोष व्रत, 10 अगस्त को सोम प्रदोष और 25 अगस्त को भौम प्रदोष; जानें पूजा विधि और महत्व

हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। यह व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है और हर महीने की त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र माना जाता है। साल 2026 में सावन मास के दौरान दो प्रदोष व्रत पड़ेंगे, जिनका धार्मिक महत्व और भी बढ़ जाता है।

सावन 2026 में पहला प्रदोष व्रत 10 अगस्त को सोम प्रदोष व्रत के रूप में और दूसरा प्रदोष व्रत 25 अगस्त को भौम प्रदोष व्रत के रूप में मनाया जाएगा। मान्यता है कि सावन में प्रदोष व्रत रखने और भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

सोम प्रदोष व्रत 2026 की तिथि

सावन मास का पहला प्रदोष व्रत सोमवार, 10 अगस्त 2026 को रखा जाएगा। सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित माना जाता है, इसलिए सोमवार के दिन पड़ने वाला प्रदोष व्रत विशेष फलदायी माना जाता है।

सोम प्रदोष व्रत का महत्व

सोम प्रदोष व्रत करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होने की मान्यता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन शिवजी की पूजा करने से मानसिक शांति, सुख-समृद्धि और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है।

भौम प्रदोष व्रत 2026 की तिथि

सावन का दूसरा प्रदोष व्रत मंगलवार, 25 अगस्त 2026 को रखा जाएगा। मंगलवार को पड़ने के कारण इसे भौम प्रदोष व्रत कहा जाता है।

भौम प्रदोष व्रत का महत्व

भौम प्रदोष व्रत को भगवान शिव के साथ मंगल ग्रह से भी जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि इस व्रत को करने से साहस, आत्मविश्वास और जीवन की परेशानियों से लड़ने की शक्ति मिलती है।

प्रदोष व्रत में पूजा का शुभ समय

प्रदोष व्रत में भगवान शिव की पूजा प्रदोष काल में करना सबसे शुभ माना जाता है। प्रदोष काल सूर्यास्त के बाद शुरू होता है और इसी समय भगवान शिव का अभिषेक और पूजन किया जाता है।

हालांकि, पूजा का सही समय स्थान के अनुसार सूर्यास्त के समय में अंतर के कारण बदल सकता है। इसलिए अपने शहर के पंचांग के अनुसार प्रदोष काल का समय देखना उचित रहता है।

प्रदोष व्रत की पूजा विधि

  • सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें।
  • भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करें।
  • शाम के समय प्रदोष काल में शिवलिंग का अभिषेक करें।
  • शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और फूल अर्पित करें।
  • भगवान शिव को भोग लगाएं और शिव मंत्रों का जाप करें।
  • अंत में शिव आरती करें और परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना करें।

सावन में प्रदोष व्रत क्यों है खास?

सावन का महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माना जाता है। इस दौरान शिव भक्त कांवड़ यात्रा, रुद्राभिषेक और सोमवार व्रत जैसे धार्मिक कार्य करते हैं। सावन में आने वाला प्रदोष व्रत भगवान शिव की विशेष कृपा पाने का अवसर माना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रद्धा और नियमों के साथ प्रदोष व्रत करने से भगवान शिव भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं और जीवन में सुख-शांति का आशीर्वाद देते हैं। हालांकि, धार्मिक परंपराएं और मान्यताएं आस्था पर आधारित होती हैं।

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