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Sawan 2026: सावन में इन दिनों करें शिवलिंग पर जलाभिषेक, भोलेनाथ की कृपा पाने के लिए बेहद शुभ मानी जाती हैं ये तिथियां

Sawan 2026: सावन में इन दिनों करें शिवलिंग पर जलाभिषेक, भोलेनाथ की कृपा पाने के लिए बेहद शुभ मानी जाती हैं ये तिथियां

भगवान शिव की आराधना के लिए सावन का महीना सबसे पवित्र महीनों में से एक माना जाता है। इस पूरे महीने में भक्त महादेव की पूजा, रुद्राभिषेक और जलाभिषेक करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन में शिवलिंग पर जल अर्पित करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों के जीवन से कष्ट दूर होने की कामना की जाती है।

विशेष रूप से सावन सोमवार और सावन शिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर जल चढ़ाने का विशेष महत्व बताया गया है। इस दौरान भक्त गंगाजल, दूध और पवित्र जल से भगवान शिव का अभिषेक करते हैं और सुख-समृद्धि की प्रार्थना करते हैं।

सावन में जलाभिषेक का महत्व

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान निकले विष को भगवान शिव ने अपने कंठ में धारण किया था। विष के प्रभाव को शांत करने के लिए देवताओं ने भगवान शिव का जल से अभिषेक किया था। इसी मान्यता के चलते सावन में जल चढ़ाने की परंपरा को विशेष महत्व दिया जाता है।

मान्यता है कि सावन में श्रद्धा और विधि-विधान से शिवलिंग पर जल अर्पित करने से मन को शांति मिलती है और भगवान भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

सावन सोमवार को जल चढ़ाने का महत्व

सावन के प्रत्येक सोमवार को भगवान शिव की पूजा के लिए विशेष दिन माना जाता है। इस दिन सुबह स्नान करके शिवलिंग पर जल अर्पित करना शुभ माना जाता है।

भक्त इस दिन "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करते हुए भगवान शिव का अभिषेक करते हैं। मान्यता है कि सावन सोमवार का व्रत और पूजा करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

सावन शिवरात्रि पर जलाभिषेक

सावन शिवरात्रि भगवान शिव की आराधना का विशेष पर्व माना जाता है। इस दिन रात्रि में शिव पूजा और अभिषेक का विशेष महत्व होता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शिवरात्रि के दिन चारों प्रहर में भगवान शिव की पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होता है। भक्त इस दिन जल, दूध, पंचामृत और बेलपत्र अर्पित करते हैं।

शिवलिंग पर जल चढ़ाने की सही विधि

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र पहनें।
  • पूजा स्थान और शिव मंदिर की सफाई करें।
  • शिवलिंग पर सबसे पहले जल या गंगाजल अर्पित करें।
  • इसके बाद बेलपत्र, फूल और अन्य पूजन सामग्री चढ़ाएं।
  • भगवान शिव के मंत्रों का जाप करें।
  • अंत में आरती कर भगवान से सुख-शांति की प्रार्थना करें।

इन बातों का रखें ध्यान

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शिवलिंग पर जल चढ़ाते समय तांबे, पीतल या मिट्टी के पात्र का उपयोग शुभ माना जाता है। जल अर्पित करते समय मन में श्रद्धा और सकारात्मक भाव रखना सबसे महत्वपूर्ण माना गया है।

सावन 2026 में जलाभिषेक के प्रमुख दिन

सावन महीने में आने वाले सभी सोमवार और शिवरात्रि का दिन जलाभिषेक के लिए विशेष माना जाता है। भक्त अपनी सुविधा और स्थानीय पंचांग के अनुसार इन शुभ अवसरों पर भगवान शिव का अभिषेक कर सकते हैं।

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