Sawan 2026: सावन में आस्था का बड़ा केंद्र बना दक्षिण काली पीठ, आधी रात गंगा स्नान और रुद्राभिषेक के लिए उमड़ रहे श्रद्धालु
सावन का पवित्र महीना शुरू होते ही देशभर के शिवालयों और शक्तिपीठों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। इसी बीच दक्षिण काली पीठ भी भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन के दौरान यहां भगवान शिव और मां काली की आराधना का विशेष महत्व माना जाता है। आधी रात गंगा स्नान, मौन साधना और रुद्राभिषेक जैसे धार्मिक अनुष्ठानों में शामिल होने के लिए देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंच रहे हैं।
आधी रात गंगा स्नान का विशेष महत्व
धार्मिक मान्यता है कि सावन में आधी रात गंगा स्नान कर भगवान शिव का स्मरण करने से मन और आत्मा की शुद्धि होती है। स्नान के बाद श्रद्धालु दक्षिण काली पीठ पहुंचकर शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं और मां काली के दर्शन कर सुख, समृद्धि और परिवार के कल्याण की प्रार्थना करते हैं।
रुद्राभिषेक और मौन साधना के लिए उमड़ रही भीड़
सावन के प्रत्येक सोमवार और विशेष तिथियों पर मंदिर परिसर में रुद्राभिषेक का आयोजन किया जा रहा है। भक्त दूध, गंगाजल, बेलपत्र, धतूरा, भस्म और चंदन से भगवान शिव का अभिषेक कर रहे हैं। वहीं, कई श्रद्धालु आध्यात्मिक शांति और आत्मचिंतन के लिए मौन साधना भी कर रहे हैं। मान्यता है कि सावन में श्रद्धापूर्वक किया गया रुद्राभिषेक भगवान शिव की विशेष कृपा दिलाता है।
देशभर से पहुंच रहे श्रद्धालु
सावन के अवसर पर उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु दक्षिण काली पीठ पहुंच रहे हैं। मंदिर परिसर में सुबह से देर रात तक पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला जारी है। श्रद्धालु परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य और मनोकामना पूर्ति के लिए विशेष पूजा करा रहे हैं।
सावन में क्यों बढ़ जाता है धार्मिक महत्व?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन का महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। इस दौरान जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र का जाप, दान-पुण्य और शिव आराधना का विशेष फल प्राप्त होता है। मां काली और भगवान शिव की संयुक्त आराधना को भी शक्ति और शिव तत्व का प्रतीक माना जाता है।
श्रद्धालुओं के लिए जरूरी सुझाव
- मंदिर में प्रवेश से पहले स्वच्छता और अनुशासन का पालन करें।
- पूजा के दौरान मंदिर प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।
- गंगाजल, बेलपत्र और अन्य पूजन सामग्री श्रद्धापूर्वक अर्पित करें।
- भीड़भाड़ के दौरान बुजुर्गों और बच्चों का विशेष ध्यान रखें।
- पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए प्लास्टिक का उपयोग करने से बचें।

