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Sant Kabir Das Jayanti 2026: संत कबीर दास जयंती पर पढ़ें कबीर के 10 अनमोल दोहे, जो बदल सकते हैं आपकी सोच और जीवन

Sant Kabir Das Jayanti 2026: संत कबीर दास जयंती पर पढ़ें कबीर के 10 अनमोल दोहे, जो बदल सकते हैं आपकी सोच और जीवन

संत कबीर दास जयंती के अवसर पर पढ़िए कबीर के 10 प्रसिद्ध और प्रेरणादायक दोहे। जानें इन दोहों का सरल अर्थ और जीवन में उनका महत्व।

संत कबीर दास भारतीय संत परंपरा के महान कवि, समाज सुधारक और आध्यात्मिक विचारक माने जाते हैं। उन्होंने अपने दोहों के माध्यम से सत्य, प्रेम, कर्म, विनम्रता और मानवता का संदेश दिया। उनके विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने सदियों पहले थे। संत कबीर दास जयंती के अवसर पर आइए जानते हैं उनके 10 ऐसे अनमोल दोहे, जो जीवन को सही दिशा देने और सकारात्मक सोच विकसित करने की प्रेरणा देते हैं।

1. बुरा जो देखन मैं चला...

दोहा:

बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय।
जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय।।

अर्थ: दूसरों में कमी खोजने से पहले स्वयं का आत्ममंथन करना चाहिए। अपने दोषों को पहचानना ही सच्ची सीख है।

2. काल करे सो आज कर...

दोहा:

काल करे सो आज कर, आज करे सो अब।
पल में प्रलय होएगी, बहुरि करेगा कब।।

अर्थ: किसी भी जरूरी काम को टालना नहीं चाहिए। समय का सदुपयोग सफलता की पहली सीढ़ी है।

3. धीरे-धीरे रे मना...

दोहा:

धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय।
माली सींचे सौ घड़ा, ऋतु आए फल होय।।

अर्थ: हर काम का अपना समय होता है। धैर्य और निरंतर प्रयास से ही सफलता मिलती है।

4. ऐसी वाणी बोलिए...

दोहा:

ऐसी वाणी बोलिए, मन का आपा खोय।
औरन को शीतल करे, आपहुं शीतल होय।।

अर्थ: हमेशा मधुर और विनम्र शब्दों का प्रयोग करें। अच्छी वाणी रिश्तों को मजबूत बनाती है।

5. निंदक नियरे राखिए...

दोहा:

निंदक नियरे राखिए, आंगन कुटी छवाय।
बिन पानी, साबुन बिना, निर्मल करे सुभाय।।

अर्थ: आलोचना करने वाले व्यक्ति से सीख मिलती है। वह हमारी कमियों को उजागर कर हमें बेहतर बनने का अवसर देता है।

6. पोथी पढ़-पढ़ जग मुआ...

दोहा:

पोथी पढ़-पढ़ जग मुआ, पंडित भया न कोय।
ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय।।

अर्थ: केवल पुस्तकीय ज्ञान पर्याप्त नहीं है। प्रेम, करुणा और मानवता ही सच्चा ज्ञान है।

7. माटी कहे कुम्हार से...

दोहा:

माटी कहे कुम्हार से, तू क्या रौंदे मोय।
एक दिन ऐसा आएगा, मैं रौंदूंगी तोय।।

अर्थ: जीवन क्षणभंगुर है। इसलिए अहंकार छोड़कर विनम्रता के साथ जीवन जीना चाहिए।

8. जिन खोजा तिन पाइया...

दोहा:

जिन खोजा तिन पाइया, गहरे पानी पैठ।
मैं बपुरा बूडन डरा, रहा किनारे बैठ।।

अर्थ: सफलता उन्हीं को मिलती है जो जोखिम उठाकर मेहनत करते हैं। डरने वाले अक्सर अवसर खो देते हैं।

9. दुख में सुमिरन सब करें...

दोहा:

दुख में सुमिरन सब करें, सुख में करे न कोय।
जो सुख में सुमिरन करे, दुख काहे को होय।।

अर्थ: ईश्वर का स्मरण केवल कठिन समय में नहीं, बल्कि सुख के समय भी करना चाहिए।

10. साधु ऐसा चाहिए...

दोहा:

साधु ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय।
सार-सार को गहि रहे, थोथा देई उड़ाय।।

अर्थ: बुद्धिमान व्यक्ति वही है जो अच्छी बातों को ग्रहण करे और व्यर्थ की बातों को छोड़ दे।

कबीर के दोहे आज भी क्यों हैं प्रासंगिक?

संत कबीर के दोहे केवल आध्यात्मिक शिक्षा नहीं देते, बल्कि जीवन प्रबंधन, रिश्तों, व्यवहार, समय के महत्व और आत्मचिंतन का भी संदेश देते हैं। यदि इन शिक्षाओं को दैनिक जीवन में अपनाया जाए तो व्यक्ति सकारात्मक सोच के साथ बेहतर और संतुलित जीवन जी सकता है।

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