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Ravi Pradosh Vrat 2026: शादी की बात बार-बार टूट जाती है? रवि प्रदोष व्रत की शाम करें भगवान शिव के ये आसान उपाय, विवाह बाधा दूर होने की है मान्यता

Ravi Pradosh Vrat 2026: शादी की बात बार-बार टूट जाती है? रवि प्रदोष व्रत की शाम करें भगवान शिव के ये आसान उपाय, विवाह बाधा दूर होने की है मान्यता

12 जुलाई 2026 को पड़ने वाला रवि प्रदोष व्रत भगवान शिव की आराधना के लिए बेहद शुभ माना जाता है। इस बार प्रदोष व्रत रविवार के दिन होने से इसका धार्मिक महत्व और भी बढ़ गया है। सनातन धर्म की मान्यताओं के अनुसार प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से जीवन की अनेक बाधाएं दूर होती हैं। विशेष रूप से जिन लोगों के विवाह में बार-बार रुकावटें आ रही हैं या रिश्ता तय होकर भी किसी कारण से टूट जाता है, उनके लिए यह दिन विशेष फलदायी माना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष काल में श्रद्धा और विधि-विधान से भगवान शिव का अभिषेक, माता पार्वती की पूजा और कुछ सरल उपाय करने से विवाह संबंधी बाधाएं दूर होने तथा योग्य जीवनसाथी मिलने की कामना की जाती है।

प्रदोष काल में करें शिवलिंग का अभिषेक

शाम के प्रदोष काल में शिवलिंग का जल, गंगाजल, दूध, दही, शहद और पंचामृत से अभिषेक करें। इसके बाद बेलपत्र, सफेद चंदन, धतूरा, आक के फूल और भांग अर्पित करें। पूजा के दौरान पूरे मन से 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करें। धार्मिक विश्वास है कि इससे भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्तों की मनोकामनाएं सुनते हैं।

माता पार्वती को अर्पित करें सिंदूर

यदि विवाह में लगातार बाधाएं आ रही हैं, तो पूजा के समय माता पार्वती को सिंदूर, लाल चुनरी, सुहाग की सामग्री और लाल पुष्प अर्पित करें। मान्यता है कि माता पार्वती अखंड सौभाग्य और सुखी दांपत्य जीवन का आशीर्वाद देती हैं। अविवाहित युवक-युवतियां श्रद्धा के साथ शीघ्र विवाह की प्रार्थना कर सकते हैं।

करें इन मंत्रों का जाप

रवि प्रदोष व्रत की शाम 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का 108 बार जाप करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा महामृत्युंजय मंत्र का जाप भी कई श्रद्धालु करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि मंत्र जाप से मन शांत होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

शिव-पार्वती की संयुक्त पूजा का महत्व

शिव और पार्वती को आदर्श दांपत्य का प्रतीक माना जाता है। इसलिए विवाह में आ रही बाधाओं को दूर करने की कामना से दोनों की संयुक्त पूजा करने की परंपरा है। पूजा के बाद शिव-पार्वती की आरती करें और परिवार के सुख, शांति एवं वैवाहिक जीवन की मंगलकामना करें।

दान-पुण्य भी माना जाता है शुभ

रवि प्रदोष व्रत के दिन जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र या अपनी क्षमता के अनुसार दान देना शुभ माना जाता है। इसके साथ ही गौ सेवा, पक्षियों को दाना डालना और बुजुर्गों का सम्मान करना भी पुण्यदायी माना जाता है।

इन बातों का रखें ध्यान

  • पूजा के समय मन में श्रद्धा और सकारात्मक भाव रखें।
  • क्रोध, विवाद और नकारात्मक विचारों से दूर रहें।
  • सात्विक भोजन ग्रहण करें और संयम का पालन करें।
  • किसी भी उपाय को अंधविश्वास नहीं, बल्कि अपनी आस्था और श्रद्धा के साथ करें।

धार्मिक मान्यता

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रवि प्रदोष व्रत पर भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करने से विवाह में आने वाली बाधाएं दूर होने, योग्य जीवनसाथी मिलने और दांपत्य जीवन में सुख-समृद्धि आने की कामना की जाती है। हालांकि, ये सभी मान्यताएं आस्था और परंपरा पर आधारित हैं। व्यक्तिगत जीवन के महत्वपूर्ण निर्णय सोच-समझकर और परिस्थितियों के अनुसार ही लेने चाहिए।

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