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Ravi Pradosh Vrat 2026: 26 जुलाई को बन रहे हैं इंद्र योग और सर्वार्थ सिद्धि योग, जानें शिव पूजा का शुभ मुहूर्त और महत्व

Ravi Pradosh Vrat 2026: 26 जुलाई को बन रहे हैं इंद्र योग और सर्वार्थ सिद्धि योग, जानें शिव पूजा का शुभ मुहूर्त और महत्व

हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व माना गया है। यह व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है और हर महीने त्रयोदशी तिथि को रखा जाता है। जुलाई 2026 में आने वाला प्रदोष व्रत इस बार रविवार के दिन पड़ रहा है, इसलिए इसे रवि प्रदोष व्रत कहा जाएगा।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रवि प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। इस बार प्रदोष व्रत पर इंद्र योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का निर्माण हो रहा है, जिसे शुभ कार्यों के लिए विशेष फलदायी माना जाता है।

26 जुलाई को रवि प्रदोष व्रत

पंचांग के अनुसार, 26 जुलाई 2026 को प्रदोष व्रत रखा जाएगा। इस दिन शिव भक्त पूरे दिन व्रत रखते हैं और शाम के समय भगवान शिव की विधि-विधान से पूजा करते हैं।

प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि इस समय भगवान शिव प्रसन्न होकर भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करते हैं।

शाम के समय ही क्यों की जाती है शिव पूजा?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष काल यानी सूर्यास्त से कुछ समय पहले और बाद का समय भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे शुभ माना जाता है।

कहा जाता है कि प्रदोष काल में भगवान शिव कैलाश पर्वत पर प्रसन्न मुद्रा में विराजमान रहते हैं और देवता भी उनकी स्तुति करते हैं। इसलिए इस समय की गई शिव पूजा का विशेष फल मिलता है।

यही कारण है कि प्रदोष व्रत में सुबह पूजा करने के बजाय शाम के समय भगवान शिव का अभिषेक, पूजन और आरती करने की परंपरा है।

रवि प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, रवि प्रदोष व्रत के दिन पूजा के लिए प्रदोष काल सबसे महत्वपूर्ण रहेगा। इस दौरान भगवान शिव को जल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और फूल अर्पित कर पूजा की जाती है।

प्रदोष पूजा का शुभ समय:
🌙 सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में शिव पूजा करना शुभ माना जाता है।

(स्थानीय शहर के अनुसार सूर्यास्त का समय अलग-अलग हो सकता है, इसलिए अपने स्थान के पंचांग के अनुसार पूजा का समय देखना बेहतर रहेगा।)

इंद्र योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का महत्व

ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, 26 जुलाई को बनने वाले इंद्र योग को शुभ और मंगलकारी माना जाता है। वहीं, सर्वार्थ सिद्धि योग को ऐसे योगों में गिना जाता है जिसमें किए गए शुभ कार्य सफल होने की संभावना बढ़ती है।

इस दिन भगवान शिव की आराधना करने से विशेष पुण्य फल मिलने की धार्मिक मान्यता है।

रवि प्रदोष व्रत में करें ये उपाय

  • भगवान शिव का जल और दूध से अभिषेक करें।
  • शिवलिंग पर बेलपत्र और सफेद फूल अर्पित करें।
  • “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें।
  • जरूरतमंदों को दान करें।
  • शाम के समय शिव आरती जरूर करें।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष व्रत भगवान शिव की कृपा पाने का उत्तम अवसर माना जाता है। हालांकि, पूजा-पाठ से जुड़े नियम और मान्यताएं व्यक्तिगत आस्था पर आधारित होती हैं।

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