सावन और प्रदोष का दुर्लभ महासंयोग: सीहोर में 11 KM लंबी कांवड़ यात्रा, सीवन नदी से कुबेरेश्वर धाम तक गूंजा हर-हर महादेव
सावन के पावन महीने और प्रदोष के दुर्लभ महासंयोग पर मंगलवार को धर्मनगरी सीहोर में श्रद्धा और आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा के सानिध्य में करीब 11 किलोमीटर लंबी ऐतिहासिक कांवड़ यात्रा का विधिवत शुभारंभ किया गया। यात्रा सीवन नदी के तट से शुरू होकर कुबेरेश्वर धाम तक पहुंची। सुबह से ही यात्रा मार्ग पर शिवभक्तों की भीड़ जुटने लगी थी। कांवड़ियों में भगवान शिव के प्रति गहरी आस्था और उत्साह देखने को मिला। यात्रा के दौरान पूरा क्षेत्र हर-हर महादेव और बोल बम के जयकारों से गूंज उठा।
सीवन नदी तट से शुरू हुई यात्रा
मंगलवार सुबह करीब 10 बजे सीवन नदी के तट से कांवड़ यात्रा का शुभारंभ हुआ। श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना की और इसके बाद कांवड़ लेकर कुबेरेश्वर धाम की ओर रवाना हुए।कांवड़ यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। कई कांवड़ियों ने पारंपरिक तरीके से कांवड़ सजाई हुई थी। यात्रा में महिलाएं और युवा भी उत्साह के साथ शामिल हुए।
पंडित प्रदीप मिश्रा के सानिध्य में आयोजन
कांवड़ यात्रा का आयोजन पंडित प्रदीप मिश्रा के सानिध्य में हुआ। उनके अनुयायियों में यात्रा को लेकर खासा उत्साह नजर आया। यात्रा के दौरान धार्मिक भजन और शिव आराधना से माहौल भक्तिमय बना रहा।श्रद्धालुओं के लिए जगह-जगह पानी और अन्य व्यवस्थाएं भी की गईं, ताकि लंबी दूरी की यात्रा के दौरान उन्हें परेशानी न हो।
11 किलोमीटर का सफर तय करेंगे कांवड़िए
सीवन नदी से कुबेरेश्वर धाम की दूरी करीब 11 किलोमीटर है। कांवड़िए इसी मार्ग से पैदल यात्रा करते हुए धाम पहुंचेंगे। वहां भगवान शिव का जलाभिषेक और पूजा-अर्चना की जाएगी।सावन में कांवड़ यात्रा का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। श्रद्धालु पवित्र नदियों से जल लेकर भगवान शिव को अर्पित करते हैं। इस दौरान शिव भक्त उपवास और भक्ति के साथ यात्रा पूरी करते हैं।
सावन और प्रदोष के संयोग से बढ़ा धार्मिक महत्व
इस बार सावन के पवित्र महीने में प्रदोष व्रत का संयोग होने से श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। सावन और प्रदोष के संयोग को शिव आराधना के लिए विशेष माना जाता है।सीहोर में आयोजित इस कांवड़ यात्रा ने शहर में धार्मिक माहौल को और भक्तिमय बना दिया। सीवन नदी से शुरू हुई यात्रा के दौरान हर-हर महादेव और बोल बम के जयकारों से पूरा मार्ग शिवमय नजर आया। यात्रा के कुबेरेश्वर धाम पहुंचने के बाद श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना करेंगे।

