Purushottam Maas 2026: मलमास में क्यों किया जाता है 33 चीजों का दान? जानें धार्मिक मान्यता और महत्व
हिंदू धर्म में अधिक मास को अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी माना गया है। इसे पुरुषोत्तम मास और मलमास के नाम से भी जाना जाता है। यह महीना भगवान विष्णु को समर्पित होता है और धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। मान्यता है कि इस दौरान किए गए जप, तप, दान, व्रत और पूजा-पाठ का फल सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक प्राप्त होता है। यही कारण है कि श्रद्धालु इस पूरे महीने धर्म-कर्म और दान-पुण्य के कार्यों में विशेष रुचि लेते हैं।
अधिक मास में 33 वस्तुओं के दान की परंपरा भी काफी प्रचलित है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दान का संबंध 33 कोटि देवताओं से माना जाता है। आइए जानते हैं कि मलमास में 33 चीजों का दान क्यों किया जाता है और इसका क्या महत्व है।
क्यों खास होता है अधिक मास?
हिंदू पंचांग के अनुसार, जब चंद्र मास और सौर मास के बीच संतुलन बनाने की आवश्यकता होती है, तब लगभग हर तीन वर्ष में एक अतिरिक्त माह जोड़ा जाता है, जिसे अधिक मास कहा जाता है। इस महीने में विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्य सामान्यतः नहीं किए जाते, लेकिन भगवान विष्णु की आराधना, कथा-श्रवण, भजन-कीर्तन और दान-पुण्य का विशेष महत्व बताया गया है।
33 चीजों का दान करने की क्या है मान्यता?
धार्मिक मान्यता के अनुसार, सृष्टि में 33 प्रमुख देव शक्तियों का उल्लेख मिलता है। इन्हीं के सम्मान और कृपा प्राप्ति के लिए अधिक मास में 33 प्रकार की वस्तुओं या 33 की संख्या में वस्तुओं का दान करने की परंपरा है। माना जाता है कि ऐसा करने से व्यक्ति को देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन में सुख, समृद्धि तथा सकारात्मकता का संचार होता है।
कौन-सी वस्तुओं का किया जाता है दान?
अधिक मास में श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार विभिन्न वस्तुओं का दान किया जाता है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—
- 33 दीपक
- 33 केले
- 33 लड्डू
- 33 प्रकार के फल
- 33 मुट्ठी अनाज
- 33 वस्त्र या वस्त्र दान के लिए सहयोग
- 33 सिक्के
- गुड़, चावल, गेहूं, तिल और अन्य खाद्य सामग्री
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दान हमेशा योग्य और जरूरतमंद व्यक्ति को ही करना चाहिए।
दान करने से क्या मिलता है फल?
मान्यता है कि पुरुषोत्तम मास में किए गए दान से पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन की अनेक बाधाएं दूर होती हैं। इस दौरान जरूरतमंदों की सहायता करने से व्यक्ति के भीतर सेवा और परोपकार की भावना भी विकसित होती है। भगवान विष्णु की कृपा से सुख-शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होने की बात भी कही जाती है।
पुरुषोत्तम मास में क्या करें?
- भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की पूजा करें।
- विष्णु सहस्रनाम और भगवद्गीता का पाठ करें।
- गरीबों और जरूरतमंदों को दान दें।
- सत्संग, कथा और भजन-कीर्तन में भाग लें।
- संयमित और सात्विक जीवनशैली अपनाएं।

