Pradosh Vrat June 2026: कब है ज्येष्ठ शुक्ल प्रदोष व्रत? जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि और महत्व
: सनातन धर्म में प्रदोष व्रत भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। प्रत्येक माह कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। जून 2026 में पड़ने वाला ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष का प्रदोष व्रत शिव भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन प्रदोष काल में भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश, कार्तिकेय और नंदी की विधिपूर्वक पूजा करने का विधान है।
जून 2026 में प्रदोष व्रत कब है?
पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ शुक्ल प्रदोष व्रत 29 जून 2026, सोमवार को रखा जाएगा। सोमवार को पड़ने के कारण इसे सोम प्रदोष व्रत भी कहा जाएगा, जो भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है।
प्रदोष काल और पूजा का शुभ मुहूर्त
प्रदोष व्रत में सूर्यास्त के बाद का समय सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी दौरान भगवान शिव की पूजा की जाती है।
- तिथि: 29 जून 2026
- वार: सोमवार
- प्रदोष काल: शाम लगभग 6:45 बजे से 8:50 बजे तक (स्थान अनुसार समय में अंतर संभव है)
भक्तों को प्रदोष काल में शिवलिंग का अभिषेक कर विधिवत पूजा करनी चाहिए।
प्रदोष व्रत की पूजा विधि
1. सुबह करें व्रत का संकल्प
प्रातःकाल स्नान कर भगवान शिव का ध्यान करें और व्रत का संकल्प लें।
2. प्रदोष काल में करें पूजा
शाम के समय शिव मंदिर जाएं या घर में शिव परिवार की पूजा करें।
3. शिवलिंग का अभिषेक करें
शिवलिंग पर जल, गंगाजल, दूध, दही, शहद, बेलपत्र, धतूरा और अक्षत अर्पित करें।
4. मंत्र जाप करें
- ॐ नमः शिवाय
- महामृत्युंजय मंत्र
- शिव चालीसा एवं प्रदोष व्रत कथा का पाठ
5. शिव परिवार की आराधना
भगवान शिव के साथ माता पार्वती, गणेशजी, कार्तिकेय और नंदी की पूजा भी करें।
प्रदोष व्रत का महत्व
धार्मिक मान्यता है कि प्रदोष व्रत रखने और प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। इस व्रत से सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य, वैवाहिक सुख और मनोकामनाओं की पूर्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है। सोम प्रदोष व्रत विशेष रूप से मानसिक शांति और शिव कृपा प्राप्त करने के लिए शुभ माना जाता है।
प्रदोष व्रत के दिन क्या करें?
- शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित करें।
- प्रदोष काल में दीपक जलाएं।
- गरीबों और जरूरतमंदों को दान दें।
- शिव मंत्रों का जाप करें।
- सात्विक भोजन ग्रहण करें।
क्या न करें?
- क्रोध और विवाद से बचें।
- तामसिक भोजन का सेवन न करें।
- किसी का अपमान न करें।
- नकारात्मक विचारों से दूर रहें।

