प्रदोष व्रत 2026: आज का गुरु प्रदोष, उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र के साथ जानें पूजा का महत्व और शुभ समय
आज का दिन धार्मिक दृष्टि से अत्यंत विशेष माना जा रहा है क्योंकि आज गुरु प्रदोष व्रत का संयोग बन रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित एक महत्वपूर्ण व्रत है, जिसे हर महीने की त्रयोदशी तिथि को संध्या काल में किया जाता है।
आज के दिन उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र का प्रभाव भी रहेगा, जो रात 10:36 बजे तक सक्रिय रहेगा। इस नक्षत्र को शुभ कार्यों और आध्यात्मिक साधना के लिए अनुकूल माना जाता है, जिससे आज का प्रदोष व्रत और भी अधिक फलदायी हो जाता है।
गुरु प्रदोष व्रत का महत्व
प्रदोष व्रत विशेष रूप से भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा प्राप्त करने के लिए रखा जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर जीवन के कष्ट दूर होते हैं, मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और परिवार में सुख-समृद्धि आती है।
गुरु प्रदोष के दिन पूजा का विशेष महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि यह गुरुवार के दिन पड़ता है, जिसे देवगुरु बृहस्पति से भी जोड़ा जाता है। ऐसे में इस व्रत का फल और भी शुभ माना जाता है।
पूजा का समय और विधि
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रदोष व्रत की पूजा संध्या काल में करना सबसे उत्तम माना जाता है। सूर्यास्त के बाद का समय भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत शुभ होता है। इस समय भक्त शिवलिंग का अभिषेक करते हैं और पूरे शिव परिवार—भगवान शिव, माता पार्वती, गणेश जी और कार्तिकेय जी—की पूजा करते हैं।
पूजा में बेलपत्र, दूध, दही, शहद और गंगाजल का विशेष महत्व होता है। इसके साथ “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है।
नक्षत्र का प्रभाव
उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र को स्थिरता और समृद्धि देने वाला नक्षत्र माना जाता है। इस दौरान किए गए धार्मिक कार्यों का प्रभाव अधिक स्थायी और फलदायी होता है। यही कारण है कि आज का प्रदोष व्रत भक्तों के लिए और भी अधिक महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

