Pitru Paksha 2026: पितृपक्ष में भूलकर भी न करें ये काम, वरना पितृ दोष से हो सकता है नुकसान
हिंदू धर्म में पितृपक्ष को पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, स्मरण और तर्पण का विशेष समय माना जाता है। इस दौरान लोग अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान जैसे धार्मिक कर्म करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृपक्ष के दिनों में घर का वातावरण शांत, सात्विक और सकारात्मक रखना चाहिए।
आचार्य मदनमोहन के अनुसार, इस अवधि में कुछ ऐसे काम भी बताए गए हैं जिन्हें करने से बचने की धार्मिक मान्यता है। आइए जानते हैं पितृपक्ष के दौरान किन 7 कामों से दूरी रखने की सलाह दी जाती है।
1. शादी और दूसरे शुभ कार्यों से बचें
पितृपक्ष को मुख्य रूप से पूर्वजों को समर्पित समय माना जाता है। इसलिए धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दौरान शादी, सगाई, गृह प्रवेश या नए कारोबार की शुरुआत जैसे मांगलिक कार्यों को टालने की सलाह दी जाती है। इसी तरह बड़ी खरीदारी, नई प्रॉपर्टी या वाहन खरीदने से भी लोग बचते हैं।
2. नए कपड़े खरीदने से बचें
पितृपक्ष में सादगी और पूर्वजों के स्मरण पर जोर दिया जाता है। इसी वजह से इन दिनों नए कपड़े खरीदने या पहनने से बचने की परंपरा कई परिवारों में मानी जाती है। हालांकि, जरूरतमंदों या ब्राह्मणों को दान देने के लिए वस्त्र खरीदे जा सकते हैं।
3. मांस-मदिरा से दूरी रखें
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पितृपक्ष में सात्विक भोजन करने पर जोर दिया जाता है। इसलिए मांस, मदिरा और अन्य तामसिक माने जाने वाले पदार्थों से दूरी रखने की सलाह दी जाती है। इस दौरान घर में भी शांत और सात्विक माहौल बनाए रखने की परंपरा है।
4. घर में झगड़ा और विवाद न करें
पितृपक्ष के दौरान परिवार के सदस्यों को आपसी विवाद, गुस्सा और कलह से बचने की सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यता है कि इन दिनों मन और वाणी पर संयम रखना चाहिए और घर का वातावरण शांत बनाए रखना चाहिए।
5. किसी असहाय व्यक्ति को परेशान न करें
इस अवधि में जरूरतमंद और असहाय लोगों के प्रति दया और करुणा रखने पर विशेष जोर दिया जाता है। किसी गरीब, बुजुर्ग या कमजोर व्यक्ति को परेशान करने से बचना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं में सेवा और दान को भी इस अवधि से जोड़ा गया है।
6. पशु-पक्षियों के साथ बुरा व्यवहार न करें
पितृपक्ष के दौरान पशु-पक्षियों के प्रति भी करुणा और दया रखने की सलाह दी जाती है। उन्हें परेशान करने या नुकसान पहुंचाने से बचना चाहिए। कई परंपराओं में इस दौरान पशु-पक्षियों को भोजन कराने को भी पुण्यकारी माना जाता है।
7. झूठ, अपशब्द और किसी को दुख पहुंचाने से बचें
पितृपक्ष में वाणी और व्यवहार को संयमित रखने की धार्मिक मान्यता है। इसलिए झूठ बोलने, किसी को अपशब्द कहने, अपमान करने या जानबूझकर किसी का दिल दुखाने से बचने की सलाह दी जाती है।
इसके अलावा, पितृपक्ष में परिवार की परंपरा के अनुसार पूर्वजों का श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करना महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन दिनों सादगी, सेवा, दान और पूर्वजों के प्रति श्रद्धा का भाव रखना चाहिए।

