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Palli Kondeswara Temple: भारत का अनोखा शिव मंदिर, जहां माता पार्वती की गोद में शयन मुद्रा में विराजमान हैं भगवान शिव

Palli Kondeswara Temple: भारत का अनोखा शिव मंदिर, जहां माता पार्वती की गोद में शयन मुद्रा में विराजमान हैं भगवान शिव

भारत में भगवान शिव के हजारों मंदिर हैं, लेकिन आंध्र प्रदेश का एक मंदिर अपनी अनूठी मान्यता और अद्भुत स्वरूप के कारण विशेष पहचान रखता है। आंध्र प्रदेश के सुरुतापल्ली में स्थित पल्ली कोंडेश्वरार मंदिर देश का एकमात्र ऐसा शिव मंदिर माना जाता है, जहां भगवान शिव शयन मुद्रा में माता पार्वती की गोद में विराजमान हैं। यही वजह है कि यह मंदिर श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

कहां स्थित है यह अद्भुत मंदिर?

Palli Kondeswara Temple आंध्र प्रदेश के तिरुपति जिले के सुरुतापल्ली गांव में स्थित है। यह मंदिर तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश की सीमा के करीब होने के कारण दोनों राज्यों के श्रद्धालुओं के बीच काफी लोकप्रिय है।

मंदिर का मुख्य आकर्षण भगवान शिव की दुर्लभ शयन मुद्रा वाली प्रतिमा है, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से भक्त यहां पहुंचते हैं।

क्या है पौराणिक कथा?

पौराणिक मान्यता के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान निकले विष को भगवान शिव ने संसार की रक्षा के लिए अपने कंठ में धारण कर लिया था। विषपान के बाद उनका शरीर अत्यंत गर्म हो गया और वे थककर विश्राम करने लगे।

कहा जाता है कि इसी दौरान माता पार्वती ने भगवान शिव का सिर अपनी गोद में रखा और उन्हें विश्राम कराया। सुरुतापल्ली को वही स्थान माना जाता है, जहां भगवान शिव ने विश्राम किया था। इसी घटना की स्मृति में यहां उनकी शयन मुद्रा वाली प्रतिमा स्थापित की गई।

मंदिर की विशेषता

अधिकांश शिव मंदिरों में भगवान शिव की पूजा शिवलिंग के रूप में होती है, लेकिन इस मंदिर में भगवान शिव की विशाल प्रतिमा शयन अवस्था में विराजमान है। उनके सिर को माता पार्वती अपनी गोद में थामे हुए दिखाई देती हैं।

यह स्वरूप भगवान शिव के करुणामय और मानवता की रक्षा करने वाले रूप को दर्शाता है। मंदिर की यह अनूठी प्रतिमा श्रद्धालुओं को विशेष आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करती है।

प्रदोष पूजा का विशेष महत्व

इस मंदिर में प्रदोष काल की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि यहां प्रदोष व्रत और पूजा करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं तथा जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।

प्रदोष के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचकर भगवान शिव और माता पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र

पल्ली कोंडेश्वरार मंदिर न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि अपनी वास्तुकला और पौराणिक मान्यताओं के कारण भी प्रसिद्ध है। यहां आने वाले श्रद्धालु भगवान शिव के इस दुर्लभ स्वरूप के दर्शन कर स्वयं को धन्य मानते हैं।

क्यों खास है यह मंदिर?

  • भगवान शिव की शयन मुद्रा वाली दुर्लभ प्रतिमा।
  • माता पार्वती की गोद में विश्राम करते महादेव का स्वरूप।
  • समुद्र मंथन और हलाहल विष की कथा से जुड़ी मान्यता।
  • प्रदोष पूजा के लिए विशेष प्रसिद्धि।
  • दक्षिण भारत के प्रमुख शिव तीर्थों में से एक।

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