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पद्मिनी एकादशी 2026: अधिकमास में आने वाली पावन एकादशी, जानें मई में कब रखा जाएगा व्रत और इसका महत्व 🙏

पद्मिनी एकादशी 2026: अधिकमास में आने वाली पावन एकादशी, जानें मई में कब रखा जाएगा व्रत और इसका महत्व 🙏

हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का अत्यंत विशेष महत्व माना जाता है। हर महीने कृष्ण और शुक्ल पक्ष में आने वाली एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित होती है। लेकिन जब यह व्रत अधिकमास (पुरुषोत्तम माह) में आता है, तो इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। वर्ष 2026 में अधिकमास के दौरान आने वाली पद्मिनी एकादशी को लेकर भक्तों में विशेष उत्साह देखा जा रहा है।

🌸 क्या है पद्मिनी एकादशी?

पद्मिनी एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित एक अत्यंत पुण्यदायी व्रत माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को करने से व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और जीवन में सुख, समृद्धि तथा मोक्ष की प्राप्ति होती है। विशेष रूप से अधिकमास में आने के कारण इस एकादशी का महत्व और भी बढ़ जाता है, क्योंकि अधिकमास को स्वयं भगवान विष्णु का प्रिय मास कहा जाता है।

📅 मई 2026 में कब है पद्मिनी एकादशी?

पंचांग गणना के अनुसार, वर्ष 2026 में अधिकमास (पुरुषोत्तम माह) के दौरान पद्मिनी एकादशी का व्रत मई माह में पड़ने की संभावना है। सामान्य रूप से एकादशी तिथि चंद्रमा की स्थिति के आधार पर निर्धारित होती है, इसलिए इसकी सही तिथि और समय पंचांग के अनुसार भिन्न हो सकते हैं।

हालांकि अनुमानित रूप से यह एकादशी मई 2026 के मध्य या अंतिम सप्ताह में पड़ सकती है। भक्तों को सलाह दी जाती है कि वे अपने स्थानीय पंचांग या ज्योतिषीय गणना के अनुसार ही व्रत की सटीक तिथि और पारण समय की पुष्टि करें।

🕉️ पद्मिनी एकादशी का धार्मिक महत्व

पद्मिनी एकादशी को मोक्ष प्रदान करने वाली एकादशी माना गया है। धार्मिक ग्रंथों में वर्णन मिलता है कि इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति को जन्म-जन्मांतर के पापों से मुक्ति मिलती है। इसके साथ ही भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है।

अधिकमास में आने के कारण यह व्रत और भी अधिक फलदायी माना जाता है। कहा जाता है कि इस दिन व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है।

🌺 व्रत विधि और पूजा नियम

पद्मिनी एकादशी के दिन भक्त प्रातःकाल स्नान करके व्रत का संकल्प लेते हैं। पूरे दिन उपवास रखा जाता है और भगवान विष्णु की पूजा तुलसी पत्र, पीले फूल और धूप-दीप से की जाती है। इस दिन विष्णु सहस्त्रनाम और भगवद् गीता का पाठ करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

रात्रि जागरण और भजन-कीर्तन का भी विशेष महत्व होता है। अगले दिन द्वादशी तिथि पर व्रत का पारण किया जाता है।

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