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सावन का दूसरा सोमवार 10 अगस्त को, सोम प्रदोष व्रत का भी संयोग; जानें सुबह से शाम तक जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त

सावन का दूसरा सोमवार 10 अगस्त को, सोम प्रदोष व्रत का भी संयोग; जानें सुबह से शाम तक जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त

महत्व रहेगा।

सावन सोमवार के दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं। मान्यता है कि सोमवार को शिवलिंग पर जल अर्पित करने और विधि-विधान से पूजा करने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। हालांकि, जलाभिषेक का मुहूर्त स्थान और पंचांग के अनुसार कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है।

सुबह से शुरू होगी शिव पूजा

10 अगस्त को सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर भगवान शिव का ध्यान करने के बाद पूजा की शुरुआत की जा सकती है। मंदिर जाकर शिवलिंग पर गंगाजल या स्वच्छ जल अर्पित करें। इसके बाद दूध, दही, शहद और अन्य पूजन सामग्री से अभिषेक करने की परंपरा है। अंत में दोबारा जल चढ़ाकर शिवलिंग को स्वच्छ किया जाता है।

जलाभिषेक के लिए सुबह का समय

सावन सोमवार पर सुबह का समय शिव पूजा के लिए विशेष शुभ माना जाता है। श्रद्धालु सूर्योदय के बाद स्नान करके शिव मंदिर में जलाभिषेक कर सकते हैं। सुबह के समय मंदिरों में भक्तों की भीड़ अधिक रहने की संभावना होती है, इसलिए स्थानीय मंदिर के नियमों और व्यवस्था का पालन करना जरूरी है।

दोपहर में भी कर सकते हैं पूजा

अगर किसी कारण से सुबह जलाभिषेक नहीं कर पाएं तो दोपहर में भी भगवान शिव की पूजा की जा सकती है। इस दौरान शिवलिंग पर जल और बेलपत्र अर्पित करें। भगवान शिव को बेलपत्र, आक के फूल और धतूरा प्रिय माने जाते हैं। पूजा में साफ-सफाई और श्रद्धा का विशेष ध्यान रखें।

शाम को सोम प्रदोष की पूजा

10 अगस्त को सोम प्रदोष व्रत का भी संयोग होने के कारण शाम का समय विशेष महत्वपूर्ण रहेगा। प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने की परंपरा है। इस दौरान शिवलिंग का जलाभिषेक कर दीपक जलाएं और भगवान शिव की आरती करें। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार व्रत और पूजा का संकल्प ले सकते हैं।

कैसे करें शिवलिंग का जलाभिषेक?

जलाभिषेक के लिए सबसे पहले शिवलिंग को स्वच्छ जल से स्नान कराएं। इसके बाद गंगाजल या स्वच्छ जल अर्पित करें। बेलपत्र चढ़ाएं और भगवान शिव का ध्यान करते हुए 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करें। इसके बाद धूप-दीप जलाकर आरती करें।

स्थान के अनुसार बदल सकता है मुहूर्त

शिव पूजा और प्रदोष काल का सटीक समय शहर के स्थानीय पंचांग के अनुसार अलग हो सकता है। इसलिए 10 अगस्त को पूजा करने वाले श्रद्धालुओं को अपने क्षेत्र के पंचांग या स्थानीय मंदिर से सही समय की पुष्टि कर लेनी चाहिए।

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