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सावन के पहले सोमवार पर निकली बाबा महाकाल की भव्य सवारी, 'चंद्रमौलेश्वर' स्वरूप में दिए भक्तों को दर्शन

सावन के पहले सोमवार पर निकली बाबा महाकाल की भव्य सवारी, 'चंद्रमौलेश्वर' स्वरूप में दिए भक्तों को दर्शन

सावन माह के पहले सोमवार पर पूरा मध्यप्रदेश शिवभक्ति में सराबोर नजर आया। प्रदेश के प्रमुख शिवालयों में सुबह से ही श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ा, वहीं उज्जैन में विश्व प्रसिद्ध बाबा महाकाल की राजसी सवारी पूरे धार्मिक उल्लास और भव्यता के साथ निकाली गई। सवारी के दौरान भगवान महाकाल ने 'चंद्रमौलेश्वर' स्वरूप में भक्तों को दर्शन दिए।

उज्जैन की सड़कों पर 'हर-हर महादेव' और 'जय श्री महाकाल' के जयघोष गूंजते रहे। हजारों श्रद्धालु सवारी मार्ग पर बाबा महाकाल के दर्शन के लिए घंटों पहले से डटे रहे। पूरे मार्ग को आकर्षक ढंग से सजाया गया था और जगह-जगह श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर भगवान का स्वागत किया।

चांदी की पालकी में विराजे बाबा महाकाल

परंपरा के अनुसार भगवान महाकाल चंद्रमौलेश्वर स्वरूप में चांदी की भव्य पालकी में विराजमान होकर नगर भ्रमण पर निकले। पालकी के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला। भक्तों ने भगवान का जल, पुष्प और बेलपत्र अर्पित कर सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की।

सवारी के दौरान धार्मिक भजनों, ढोल-नगाड़ों और शंखनाद से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।

हाथी पर विराजित रहे भगवान मनमहेश

बाबा महाकाल की पालकी के पीछे हाथी पर भगवान मनमहेश की प्रतिमा विराजित रही। यह दृश्य श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना रहा। पारंपरिक वेशभूषा में शामिल अखाड़ों, भजन मंडलियों और श्रद्धालुओं ने सवारी की भव्यता को और भी विशेष बना दिया।

सवारी मार्ग पर श्रद्धालुओं ने हाथ जोड़कर भगवान के दर्शन किए और आशीर्वाद प्राप्त किया।

पूरे प्रदेश में शिवालयों में उमड़ी श्रद्धा

सावन के पहले सोमवार पर उज्जैन ही नहीं, बल्कि प्रदेश के अन्य प्रमुख शिव मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही। सुबह से देर रात तक जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, भस्म आरती और विशेष पूजन-अर्चन का सिलसिला चलता रहा।

भोपाल, ओंकारेश्वर, भोजपुर, मंदसौर, ग्वालियर, हरदा और अन्य शहरों के शिवालयों में भी भक्तों ने भगवान शिव की आराधना कर परिवार की सुख-समृद्धि और देश की खुशहाली की कामना की।

सुरक्षा के रहे पुख्ता इंतजाम

महाकाल की सवारी और श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। सवारी मार्ग पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा, जबकि यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए विशेष प्रबंध किए गए।

भक्ति, आस्था और उत्साह से सराबोर सावन के पहले सोमवार पर बाबा महाकाल की भव्य सवारी ने उज्जैन को पूरी तरह शिवमय बना दिया।

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