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शारदीय नवरात्रि की अष्टमी-नवमी पर घर की इन 5 जगहों पर जलाएं दीपक, सुख-समृद्धि के लिए शुभ मानी जाती है यह परंपरा

शारदीय नवरात्रि की अष्टमी-नवमी पर घर की इन 5 जगहों पर जलाएं दीपक, सुख-समृद्धि के लिए शुभ मानी जाती है यह परंपरा

शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व है। इस दौरान भक्त माता रानी को प्रसन्न करने के लिए व्रत रखते हैं, पूजा करते हैं और घर-मंदिर में दीपक जलाते हैं। खासतौर पर महाअष्टमी और महानवमी के दिन कन्या पूजन, हवन और देवी आराधना के साथ दीपदान करने की भी परंपरा है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि की अष्टमी और नवमी पर घर के कुछ खास स्थानों पर दीपक जलाना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे घर में सुख-शांति, सकारात्मकता और समृद्धि की कामना की जाती है। आचार्य मदन मोहन के अनुसार, इन दिनों घर के मुख्य द्वार से लेकर तुलसी के पौधे तक कुछ स्थानों पर दीपक जलाया जा सकता है। आइए जानते हैं ऐसी पांच जगहों के बारे में।

1. घर के मुख्य द्वार पर जलाएं दीपक

वास्तु और धार्मिक परंपराओं में घर के मुख्य द्वार को महत्वपूर्ण स्थान माना गया है। नवरात्रि की अष्टमी और नवमी पर शाम के समय मुख्य द्वार के पास दीपक जलाने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, ऐसा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा और सुख-समृद्धि बनी रहने की कामना की जाती है।

दीपक को ऐसी सुरक्षित जगह पर रखें, जहां आने-जाने वाले लोगों को परेशानी न हो और हवा से उसके गिरने का खतरा भी कम रहे।

2. तुलसी के पौधे के पास जलाएं दीया

हिंदू धर्म में तुलसी के पौधे को पूजनीय माना जाता है। कई घरों में रोजाना शाम के समय तुलसी के पास दीपक जलाने की परंपरा निभाई जाती है। नवरात्रि की अष्टमी और नवमी पर भी तुलसी के पास दीपक जलाकर परिवार की सुख-शांति और खुशहाली की प्रार्थना कर सकते हैं।

दीपक जलाते समय ध्यान रखें कि उसकी लौ से तुलसी की पत्तियों या पौधे को नुकसान न पहुंचे। दीपक को स्थिर और सुरक्षित स्थान पर रखना बेहतर है।

3. रसोई में इस जगह पर जलाएं दीपक

धार्मिक मान्यताओं में रसोई को मां अन्नपूर्णा से जोड़कर देखा जाता है। मां अन्नपूर्णा को अन्न और पोषण की देवी माना जाता है। इसी वजह से नवरात्रि की अष्टमी और नवमी पर रसोई की साफ-सुथरी जगह पर दीपक जलाकर घर में अन्न की कमी न होने और परिवार के कल्याण की कामना की जाती है।

कुछ परंपराओं में पानी रखने वाली जगह के पास दीपक जलाने का भी उल्लेख मिलता है। हालांकि, सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें। दीपक को गैस चूल्हे, सिलेंडर, पर्दों, प्लास्टिक और अन्य ज्वलनशील वस्तुओं से दूर रखें।

4. तिजोरी या धन रखने वाली जगह के पास जलाएं दीपक

नवरात्रि के दौरान धन और समृद्धि की कामना से घर की तिजोरी या धन रखने वाली जगह के पास भी दीपक जलाया जा सकता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, ऐसा करना आर्थिक खुशहाली और परिवार की उन्नति की प्रार्थना से जुड़ा है।

नौकरीपेशा लोग, व्यापारी और अन्य परिवार भी इस परंपरा को अपनी श्रद्धा के अनुसार निभा सकते हैं। ध्यान रहे कि दीपक को तिजोरी के अंदर, नोटों, कागजों, कपड़ों या किसी अन्य ज्वलनशील सामान के पास न रखें। इसे कुछ दूरी पर किसी स्थिर और सुरक्षित स्थान पर जलाएं।

5. पीपल के पेड़ के पास जलाएं दीपक

हिंदू धर्म में पीपल के पेड़ को पवित्र माना गया है। कई धार्मिक परंपराओं में पीपल के पास दीपक जलाने का विशेष महत्व बताया गया है। नवरात्रि की अष्टमी या नवमी पर शाम के समय पीपल के पेड़ के पास सरसों के तेल का दीपक जलाकर ग्रहों की शांति और जीवन में सुख-शांति की कामना की जाती है।

कुछ मान्यताओं में इस परंपरा को शनि से जुड़ी परेशानियों की शांति की प्रार्थना से भी जोड़ा जाता है। यदि आप पीपल के पास दीपक जलाते हैं, तो सूखे पत्तों, पेड़ की जड़ों और आसपास की ज्वलनशील चीजों का ध्यान रखें। सार्वजनिक स्थान पर दीपक जलाते समय स्थानीय नियमों और पर्यावरण का भी ध्यान रखें।

दीपक जलाते समय इन बातों का रखें ध्यान

  • दीपक जलाने से पहले आसपास की जगह साफ कर लें।

  • दीपक को हमेशा स्थिर और सुरक्षित स्थान पर रखें।

  • बच्चों और पालतू जानवरों की पहुंच से दीपक दूर रखें।

  • दीपक को पर्दों, कागज, कपड़ों और अन्य ज्वलनशील वस्तुओं के पास न रखें।

  • खुले स्थान पर तेज हवा होने पर दीपक जलाने से बचें या उचित सुरक्षा व्यवस्था करें।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नवरात्रि की अष्टमी और नवमी पर दीपक जलाना श्रद्धा, सकारात्मकता और सुख-समृद्धि की कामना का प्रतीक माना जाता है। इन परंपराओं को निभाते समय सुरक्षा का ध्यान रखना सबसे जरूरी है।

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