Samachar Nama
×

पद्मिनी एकादशी 2026 पर बन रहा है दुर्लभ सर्वार्थ सिद्धि योग, इस शुभ मुहूर्त में करें भगवान विष्णु की पूजा

पद्मिनी एकादशी 2026 पर बन रहा है दुर्लभ सर्वार्थ सिद्धि योग, इस शुभ मुहूर्त में करें भगवान विष्णु की पूजा

हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व माना जाता है, लेकिन जब बात पद्मिनी एकादशी की हो तो इसका पुण्य और भी बढ़ जाता है। यह एकादशी अधिक मास में पड़ती है, इसलिए इसे बेहद दुर्लभ और फलदायी माना गया है। साल 2026 में पद्मिनी एकादशी 27 मई, बुधवार को मनाई जाएगी। खास बात यह है कि इस बार इस पावन तिथि पर सर्वार्थ सिद्धि योग का भी शुभ संयोग बन रहा है, जिसे ज्योतिष शास्त्र में अत्यंत मंगलकारी माना गया है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु की विधिपूर्वक पूजा और व्रत करने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। साथ ही पापों से मुक्ति और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है।

क्यों खास है पद्मिनी एकादशी?

पद्मिनी एकादशी केवल अधिक मास में ही आती है, इसलिए इसका महत्व साधारण एकादशी से अधिक माना जाता है। मान्यता है कि इस व्रत को श्रद्धा और नियमपूर्वक करने से कई एकादशी व्रतों के बराबर पुण्य प्राप्त होता है।

धर्म ग्रंथों के अनुसार यह व्रत भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है। इस दिन उपवास, भजन-कीर्तन और विष्णु सहस्रनाम का पाठ करना शुभ माना जाता है।

सर्वार्थ सिद्धि योग का क्या है महत्व?

ज्योतिष शास्त्र में सर्वार्थ सिद्धि योग को बेहद शुभ योग माना गया है। मान्यता है कि इस योग में किए गए पूजा-पाठ, दान और धार्मिक कार्यों का कई गुना फल प्राप्त होता है।

विशेषज्ञों के अनुसार इस योग में भगवान विष्णु की पूजा करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और कार्यों में सफलता मिलने की संभावना बढ़ती है। कई लोग इस दिन नए कार्यों की शुरुआत भी शुभ मानते हैं।

पूजा का शुभ मुहूर्त

धार्मिक पंचांग के अनुसार 27 मई 2026 को सुबह से ही पद्मिनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करने और भगवान विष्णु की पूजा करने का विशेष महत्व बताया गया है।

पूजा के दौरान भगवान विष्णु को पीले फूल, तुलसी दल, पंचामृत और फल अर्पित करना शुभ माना जाता है। साथ ही “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करने से विशेष लाभ मिलने की मान्यता है।

पद्मिनी एकादशी व्रत कथा

पौराणिक कथा के अनुसार प्राचीन समय में राजा कीर्तिवीर्य और उनकी पत्नी रानी पद्मिनी संतान सुख से वंचित थे। कई वर्षों की तपस्या के बाद देवी अनुसूया ने रानी को पद्मिनी एकादशी व्रत करने की सलाह दी।

रानी ने पूरी श्रद्धा से यह व्रत किया, जिससे प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें पुत्र रत्न का आशीर्वाद दिया। तभी से यह व्रत संतान सुख, समृद्धि और मनोकामना पूर्ति के लिए विशेष माना जाने लगा।

इस दिन क्या करें और क्या नहीं?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पद्मिनी एकादशी पर सात्विक जीवन अपनाना चाहिए। इस दिन लहसुन, प्याज और तामसिक भोजन से परहेज करना शुभ माना गया है।

इसके अलावा—

  • जरूरतमंदों को दान दें
  • तुलसी पूजा करें
  • भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें
  • क्रोध और नकारात्मक विचारों से दूर रहें

क्यों माना जाता है यह दिन अत्यंत शुभ?

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार जब दुर्लभ पद्मिनी एकादशी और सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग बनता है, तब इसका आध्यात्मिक महत्व और बढ़ जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा से किया गया व्रत व्यक्ति के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि लेकर आता है।

Share this story

Tags