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26 या 27 अक्टूबर कार्तिक मास कब, पढ़ें तुलसी पूजा का मंत्र, नियम और विधि
 

26 या 27 अक्टूबर कार्तिक मास कब, पढ़ें तुलसी पूजा का मंत्र, नियम और विधि

कुछ ही दिनों में कार्तिक का महीना शुरू होने वाला है। कार्तिक मास श्री नारायण को समर्पित है। इस पूरे महीने श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान विष्णु और धन की देवी लक्ष्मी की उपासना करने का विधान है। इस महीने में ब्रह्म मुहूर्त में स्नान, दीपदान, तुलसी सेवा और श्रीमद्भागवत का श्रवण विशेष फलदायी माना गया है। कार्तिक मास को दामोदर मास भी कहा जाता है। यह भगवान श्रीकृष्ण का प्रिय मास है। कार्तिक महीने में तुलसी की उपासना करना विशेष तौर पर पर पुण्यदायक माना गया है। ऐसी मान्यता है कि इस महीने पूरे विधि- विधान से तुलसी माता की पूजा अर्चना करने से मां लक्ष्मी की कृपा दृष्टि बनी रहती है। इसलिए कार्तिक महीने में रोज तुलसी महारानी को जल जरूर चढ़ाएं। इस पूरे महीने तुलसी माता की आराधन करने से सुख और सौभाग्य में वृद्धि होती है। आइए जानते हैं कार्तिक मास में तुलसी पूजा से जुड़े कुछ नियम, मंत्र और पूजा की विधि -

26 या 27 अक्टूबर कार्तिक मास कब, पढ़ें तुलसी पूजा का मंत्र, नियम और विधि

हिन्दू पंचांग के अनुसार, 26 अक्टूबर को सुबह में 9:42 मिनट से कार्तिक मास की प्रतिपदा तिथि शुरू हो जाएगी, जिसका समापन 27 अक्टूबर 2026 को सुबह में 7 बजे तक होगा। उदया तिथि में 27 अक्टूबर से कार्तिक मास शुरू माना जाएगा।

तुलसी पूजा के नियम

  • कभी भी बिना स्नान किए तुलसी के पत्तों को स्पर्श न करें।
  • हिंदू मान्यताओं के अनुसार, तुलसी जी को हर रोज जल देना चाहिए।
  • रविवार और एकादशी के दिन तुलसी के पौधे में भूलकर भी जल न चढ़ाएं।
  • वहीं, शास्त्रों की मानें तो सूर्य के अस्त होने के बाद तुलसी के पत्तों को न तो स्पर्श करना चाहिए और न ही तोड़ना चाहिए।
  • एकादशी और रविवार के दिन माना जाता है कि तुलसी माता प्रभु श्री हरि विष्णु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। इसलिए इन दोनों दिन तुलसी के पत्ते भी नहीं तोड़ने चाहिए।
  • तुलसी पूजा करते समय तुलसी जी का मंत्र पढ़ें।

तुलसी मंत्र

शुभम करोति कल्याणं, आरोग्यं धन संपदाम्, शत्रु बुद्धि विनाशाय, दीपं ज्योति नमोस्तुते।।

तुलसी पूजा कैसे करनी चाहिए?

सुबह उठने के बाद स्नान कर साफ वस्त्र धारण करें। इसके बाद तुलसी माता को जल चढ़ाएं। अब इन्हें सिंदूर लगाएं और लाल या गुलाबी रंग के फूल चढ़ाएं। इसके बाद तुलसी जी के पास घी का दिया चलाएं। घर परिवार में सुख समृद्धि और खुशियां लाने के लिए शाम के वक्त भी तुलसी जी के पास घी का दीपक रखें। तुलसी स्त्रोत का पाठ करने और तुलसी की विधिवत पूजा करने से श्री हरि विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है।

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