Nirjala Ekadashi Vrat 2026: निर्जला एकादशी का महत्व, व्रत की तारीख और क्या इससे शुरू कर सकते हैं एकादशी व्रत?
हिंदू धर्म में निर्जला एकादशी को सबसे कठिन और सबसे पुण्यदायी व्रतों में से एक माना गया है। यह व्रत भगवान श्रीहरि विष्णु की आराधना को समर्पित होता है और इसे अत्यंत श्रद्धा एवं नियमों के साथ किया जाता है। मान्यता है कि इस व्रत को विधि-विधान से करने पर पूरे वर्ष की सभी एकादशियों का फल प्राप्त हो सकता है।
वर्ष 2026 में निर्जला एकादशी व्रत अधिकमास के बाद ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी तिथि पर रखा जाएगा। पंचांग के अनुसार इसकी सही तिथि क्षेत्रीय गणना और चंद्र स्थिति पर निर्भर करती है, इसलिए अलग-अलग स्थानों पर इसमें थोड़ा अंतर देखने को मिल सकता है, लेकिन यह सामान्यतः जून महीने में आती है।
निर्जला एकादशी क्यों है खास?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भक्त बिना जल और अन्न के उपवास रखते हैं, इसलिए इसे “निर्जला” कहा जाता है। यह व्रत संयम, तपस्या और आत्मनियंत्रण का प्रतीक माना जाता है। भक्त पूरे दिन भगवान विष्णु का ध्यान, भजन-कीर्तन और पूजा करते हैं।
Hinduism में एकादशी व्रत को आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग बताया गया है। निर्जला एकादशी को सभी एकादशियों में सबसे अधिक फल देने वाला व्रत माना जाता है।
क्या निर्जला एकादशी से शुरू कर सकते हैं एकादशी व्रत?
धार्मिक परंपराओं के अनुसार एकादशी व्रत की शुरुआत किसी भी एकादशी से की जा सकती है। हालांकि, निर्जला एकादशी को सबसे कठिन व्रत माना जाता है क्योंकि इसमें पूरे दिन जल तक का त्याग किया जाता है। इसलिए कई लोग पहले अन्य एकादशी व्रतों का अभ्यास करके धीरे-धीरे इस व्रत को अपनाते हैं।
व्रत की विधि
इस दिन श्रद्धालु सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लेते हैं और भगवान विष्णु की पूजा करते हैं। दिनभर उपवास, मंत्र जाप और भक्ति कार्य किए जाते हैं। अगले दिन पारण के समय जल और फल ग्रहण कर व्रत का समापन किया जाता है।

