Nirjala Ekadashi 25 June 2026: साल की सबसे बड़ी एकादशी कल, जानें व्रत से जुड़ी 10 जरूरी बातें
हिंदू धर्म में निर्जला एकादशी को सभी एकादशियों में सबसे श्रेष्ठ और पुण्यदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से व्रत और भगवान विष्णु की पूजा करने से वर्षभर की सभी एकादशियों के बराबर पुण्य फल प्राप्त होता है। वर्ष 2026 में निर्जला एकादशी 25 जून, गुरुवार को मनाई जाएगी। आइए जानते हैं इस व्रत से जुड़ी 10 महत्वपूर्ण बातें।
1. क्यों खास है निर्जला एकादशी?
निर्जला एकादशी को भीमसेनी एकादशी और पांडव एकादशी भी कहा जाता है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है और इसे सभी एकादशियों में सबसे कठिन माना जाता है।
2. निर्जला एकादशी कब है?
इस वर्ष निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून 2026, गुरुवार को रखा जाएगा। श्रद्धालु इस दिन उपवास रखकर भगवान विष्णु की आराधना करेंगे।
3. निर्जला व्रत का क्या अर्थ है?
'निर्जला' का अर्थ है बिना जल के। इस व्रत में अन्न के साथ-साथ जल का भी त्याग किया जाता है। हालांकि स्वास्थ्य कारणों से लोग अपनी क्षमता के अनुसार व्रत कर सकते हैं।
4. किस भगवान की पूजा की जाती है?
निर्जला एकादशी पर भगवान विष्णु, श्रीहरि नारायण और माता लक्ष्मी की पूजा का विधान है।
5. पूजा में क्या अर्पित करें?
भगवान विष्णु को तुलसी दल, पीले फूल, फल, पंचामृत और प्रसाद अर्पित करना शुभ माना जाता है।
6. कौन-सा मंत्र जपें?
इस दिन "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जाप विशेष फलदायी माना गया है। विष्णु सहस्रनाम का पाठ भी किया जाता है।
7. भीमसेनी एकादशी कथा क्यों पढ़ी जाती है?
मान्यता है कि निर्जला एकादशी की कथा सुनने या पढ़ने से व्रत पूर्ण माना जाता है। यह कथा महाभारत काल में भीमसेन और महर्षि वेदव्यास से जुड़ी हुई है।
8. इस दिन क्या दान करना चाहिए?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जल से भरा घड़ा, छाता, पंखा, फल, वस्त्र और अन्न का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
9. क्या नहीं करना चाहिए?
- क्रोध और विवाद से बचें।
- झूठ और छल-कपट न करें।
- तामसिक भोजन का सेवन न करें।
- किसी का अपमान न करें।
10. निर्जला एकादशी का फल क्या माना जाता है?
मान्यता है कि इस व्रत को श्रद्धा और नियमपूर्वक करने से पापों का नाश होता है, भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख, शांति एवं समृद्धि आती है।
निर्जला एकादशी का महत्व
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, जो व्यक्ति सभी एकादशी व्रत नहीं कर पाता, वह केवल निर्जला एकादशी का व्रत रखकर भी वर्षभर की एकादशियों के समान पुण्य प्राप्त कर सकता है। यही कारण है कि इसे वर्ष की सबसे महत्वपूर्ण एकादशियों में गिना जाता है।

