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Navratri 2026: नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा, जानें शुभ मुहूर्त, राहुकाल और चंद्र दर्शन का समय

Navratri 2026: नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा, जानें शुभ मुहूर्त, राहुकाल और चंद्र दर्शन का समय

शारदीय नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की आराधना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां ब्रह्मचारिणी तप, संयम और साधना की प्रतीक हैं। इस दिन भक्त पूजा-अर्चना, मंत्र जाप और व्रत के जरिए माता का आशीर्वाद प्राप्त करने की कामना करते हैं। सोमवार को द्वितीया तिथि रात 10:13 बजे तक रहने के बाद तृतीया शुरू होगी। ऐसे में पूजा के लिए तिथि के साथ शुभ मुहूर्त और दिन के प्रमुख समय की जानकारी रखना उपयोगी है।

मां ब्रह्मचारिणी की पूजा कैसे करें?

नवरात्रि के दूसरे दिन सुबह स्नान के बाद पूजा स्थल की सफाई करें और मां दुर्गा के ब्रह्मचारिणी स्वरूप का ध्यान करें। माता को फूल अर्पित करें, दीपक जलाएं और श्रद्धानुसार मंत्र जाप करें।

पूजा का मंत्र: ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः।

धार्मिक परंपरा में चमेली का फूल मां ब्रह्मचारिणी को प्रिय माना जाता है। उनके एक हाथ में जपमाला और दूसरे हाथ में कमंडल होता है। यह स्वरूप तपस्या, धैर्य और आत्मसंयम का प्रतीक माना जाता है।

आज का पंचांग और शुभ मुहूर्त

  • वार: सोमवार
  • तिथि: शुक्ल द्वितीया, रात 10:13 बजे तक
  • नक्षत्र: स्वाति, रात 11:52 बजे तक
  • योग: विष्कम्भ, रात 8:32 बजे तक
  • चंद्र राशि: तुला
  • सूर्योदय: सुबह 6:20 बजे
  • सूर्यास्त: शाम 5:55 बजे
  • अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:44 से दोपहर 12:31 बजे तक
  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:41 से 5:30 बजे तक
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 2:03 से 2:50 बजे तक
  • गोधूलि मुहूर्त: शाम 5:55 से 6:20 बजे तक

राहुकाल और यमगण्ड का समय

पंचांग में राहुकाल और यमगण्ड को नए शुभ कार्य शुरू करने के लिए अनुपयुक्त अवधि माना जाता है। दिए गए समय के अनुसार:

  • राहुकाल: सुबह 7:47 से 9:14 बजे तक
  • यमगण्ड: सुबह 10:41 से दोपहर 12:07 बजे तक
  • गुलिक काल: दोपहर 1:34 से 3:01 बजे तक
  • दुर्मुहूर्त: दोपहर 12:31 से 1:17 बजे तक और 2:50 से 3:36 बजे तक

अभिजीत मुहूर्त और यमगण्ड की अवधि में आंशिक टकराव है। दिए गए समय के हिसाब से दोपहर 12:08 से 12:30 बजे के बीच का हिस्सा दोनों अवधियों से बाहर है। हालांकि, किसी विशेष धार्मिक संस्कार या महत्वपूर्ण कार्य के लिए स्थानीय पंचांग के अनुसार मुहूर्त की पुष्टि करना उचित रहेगा।

रात में तृतीया शुरू होने पर क्या बदल जाएगी पूजा?

द्वितीया तिथि रात 10:13 बजे समाप्त होगी, जिसके बाद तृतीया शुरू हो जाएगी। लेकिन दिन की सुबह द्वितीया होने के कारण नवरात्रि के दूसरे दिन की पूजा मां ब्रह्मचारिणी को ही समर्पित रहेगी। केवल रात में तिथि बदलने से दिन की पूजा का स्वरूप नहीं बदलता।

भक्त सुबह या शाम अपनी सुविधा के अनुसार पूजा कर सकते हैं। नियमित आरती और नवरात्रि पाठ के लिए तिथि बदलने का इंतजार करना जरूरी नहीं है।

चंद्र दर्शन का समय

दिए गए पंचांग के अनुसार, दिल्ली-NCR में चंद्रास्त शाम 6:36 बजे और सूर्यास्त शाम 5:55 बजे है। इस कारण सूर्यास्त के बाद चंद्र दर्शन के लिए समय सीमित रहेगा।

चंद्रमा देखने के इच्छुक लोग सूर्यास्त के तुरंत बाद पश्चिम दिशा में खुले आसमान की ओर देख सकते हैं। बादल, धुंध और आसपास की इमारतों के कारण चंद्र दर्शन में परेशानी हो सकती है।

नवरात्रि के दूसरे दिन ध्यान रखें ये बातें

  1. मां ब्रह्मचारिणी की पूजा और मंत्र जाप श्रद्धापूर्वक करें।
  2. शुभ कार्य शुरू करने से पहले स्थानीय पंचांग में दिए गए मुहूर्त की पुष्टि करें।
  3. चंद्र दर्शन करना हो तो सूर्यास्त के बाद ज्यादा देर न करें।
  4. नियमित पूजा और आरती को राहुकाल के कारण रोकने की आवश्यकता नहीं है।

ध्यान दें: लेख में दिए गए समय उपलब्ध पंचांग विवरण पर आधारित हैं। तिथि, सूर्योदय, चंद्रास्त और मुहूर्त स्थान के अनुसार अलग हो सकते हैं। धार्मिक मान्यताओं का पालन व्यक्तिगत आस्था का विषय है।

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