Moti Kab Pahenna Chahiye: मोती कब पहनना चाहिए? जानें सही दिन, धातु और इन 4 जरूरी बातों का ध्यान
ज्योतिष शास्त्र में मोती को चंद्रमा का रत्न माना जाता है। इसे मन की शांति, भावनात्मक संतुलन और सकारात्मक सोच से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि कुंडली में चंद्रमा कमजोर होने पर ज्योतिषीय सलाह के अनुसार मोती धारण किया जा सकता है। हालांकि, बिना कुंडली का विश्लेषण किए कोई भी रत्न पहनना उचित नहीं माना जाता, क्योंकि रत्नों का प्रभाव व्यक्ति की जन्मकुंडली और ग्रह स्थिति से जोड़कर देखा जाता है।
मोती कब पहनना चाहिए?
ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार मोती धारण करने के लिए सोमवार का दिन शुभ माना जाता है। सोमवार चंद्रमा को समर्पित माना जाता है। कई ज्योतिषीय परंपराओं में शुक्ल पक्ष के सोमवार को मोती धारण करने की सलाह दी जाती है। मोती को सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर पूजा-पाठ के बाद धारण करने की परंपरा है। हालांकि, सटीक समय और विधि के लिए अपनी जन्मकुंडली के अनुसार ज्योतिष विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर माना जाता है।
इन 4 बातों का रखें खास ध्यान
1. कुंडली देखकर ही पहनें
मोती को चंद्रमा का रत्न माना जाता है। इसलिए इसे धारण करने से पहले कुंडली में चंद्रमा की स्थिति का अध्ययन कराने की सलाह दी जाती है। हर व्यक्ति के लिए मोती उपयुक्त हो, यह जरूरी नहीं है।
2. धातु का रखें ध्यान
ज्योतिषीय परंपरा में मोती को चांदी की अंगूठी में धारण करना आम माना जाता है। अंगूठी ऐसी होनी चाहिए कि मोती त्वचा को स्पर्श करता रहे। हालांकि, धातु और अंगुली को लेकर अलग-अलग ज्योतिषीय मत भी मिलते हैं।
3. असली और अच्छी गुणवत्ता का मोती लें
मोती खरीदते समय उसकी गुणवत्ता और वास्तविकता का ध्यान रखना जरूरी है। बाजार में प्राकृतिक, संवर्धित और कृत्रिम मोती उपलब्ध होते हैं। महंगा रत्न खरीदने से पहले उसकी प्रमाणिकता की जांच कर लेना चाहिए।
4. धारण करने से पहले पूजा करें
धार्मिक मान्यता के अनुसार मोती को धारण करने से पहले उसे साफ करके भगवान शिव या चंद्रमा की पूजा करने की परंपरा है। इसके बाद मंत्र जाप कर इसे धारण किया जाता है। अलग-अलग परंपराओं में मंत्र और विधि अलग हो सकती है।
मोती पहनने से क्या लाभ माना जाता है?
ज्योतिष में मोती को मानसिक शांति, भावनात्मक स्थिरता, एकाग्रता और आत्मविश्वास से जोड़कर देखा जाता है। कुछ मान्यताओं के अनुसार यह चंद्रमा से संबंधित सकारात्मक प्रभावों को मजबूत करने में सहायक माना जाता है।हालांकि, इन ज्योतिषीय दावों की वैज्ञानिक पुष्टि नहीं हुई है। रत्न धारण करने का निर्णय धार्मिक आस्था के बजाय व्यक्तिगत पसंद और विशेषज्ञ ज्योतिषीय सलाह के आधार पर लेना चाहिए।

