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Mangla Gauri Vrat 2026: सावन में कब-कब रखा जाएगा मंगला गौरी व्रत? जानें तिथि, पूजा विधि, महत्व और व्रत के लाभ

Mangla Gauri Vrat 2026: सावन में कब-कब रखा जाएगा मंगला गौरी व्रत? जानें तिथि, पूजा विधि, महत्व और व्रत के लाभ

सावन का महीना भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना के लिए बेहद शुभ माना जाता है। इस पवित्र महीने में कई व्रत और त्योहार आते हैं, जिनका धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व होता है। इन्हीं में से एक है मंगला गौरी व्रत। यह व्रत माता गौरी यानी मां पार्वती और भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। खासतौर पर सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, सुखी वैवाहिक जीवन और परिवार की खुशहाली के लिए यह व्रत रखती हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मंगला गौरी व्रत करने से मां पार्वती का आशीर्वाद प्राप्त होता है और वैवाहिक जीवन में आने वाली परेशानियां दूर होती हैं। वहीं, कुंवारी कन्याएं भी अच्छे जीवनसाथी की प्राप्ति की कामना से इस व्रत को रखती हैं।

मंगला गौरी व्रत 2026 की तिथियां

सावन महीने में आने वाले मंगलवार को मंगला गौरी व्रत रखा जाता है। वर्ष 2026 में यह व्रत चार मंगलवार को रखा जाएगा।

  • पहला मंगला गौरी व्रत – 4 अगस्त 2026, मंगलवार
  • दूसरा मंगला गौरी व्रत – 11 अगस्त 2026, मंगलवार
  • तीसरा मंगला गौरी व्रत – 18 अगस्त 2026, मंगलवार
  • चौथा मंगला गौरी व्रत – 25 अगस्त 2026, मंगलवार

इन सभी दिनों में मां गौरी की पूजा करने का विशेष महत्व माना जाता है।

मंगला गौरी व्रत की पूजा विधि

मंगला गौरी व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें। इसके बाद पूजा स्थल की सफाई कर मां गौरी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।

पूजा में माता गौरी को लाल चुनरी, फूल, सिंदूर, अक्षत, फल, मिठाई और सुहाग की सामग्री अर्पित की जाती है। इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करते हुए व्रत कथा का पाठ किया जाता है। अंत में आरती कर परिवार की सुख-समृद्धि और मंगल जीवन की कामना की जाती है।

मंगला गौरी व्रत का धार्मिक महत्व

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। इसलिए मंगला गौरी व्रत को दांपत्य सुख और सौभाग्य से जोड़कर देखा जाता है।

मान्यता है कि इस व्रत को करने से पति-पत्नी के रिश्ते में प्रेम और विश्वास बढ़ता है। साथ ही परिवार में सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।

क्या केवल एक मंगला गौरी व्रत रखने से भी मिलता है शुभ फल?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन के सभी मंगलवार को मंगला गौरी व्रत रखना शुभ माना जाता है। हालांकि, अगर किसी कारणवश कोई व्यक्ति सभी व्रत नहीं रख पाता है तो श्रद्धा और विश्वास के साथ केवल एक मंगला गौरी व्रत भी कर सकता है।

मान्यता है कि भगवान और देवी-देवता भक्त की भावना को महत्व देते हैं। इसलिए व्रत की संख्या से अधिक जरूरी है कि पूजा पूरी श्रद्धा और नियमों के साथ की जाए।

मंगला गौरी व्रत के लाभ

  • वैवाहिक जीवन में सुख और शांति की प्राप्ति की मान्यता है।
  • पति की लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना की जाती है।
  • घर में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।
  • मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए मां गौरी का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

मंगला गौरी व्रत सावन महीने की प्रमुख धार्मिक परंपराओं में से एक है। यह व्रत आस्था, प्रेम और परिवार की खुशहाली से जुड़ा हुआ है। श्रद्धा और विधि-विधान से मां गौरी की पूजा करने से भक्तों को मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा मिलने की मान्यता है।

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