कुशाग्रहणी अमावस्या 2026: इस दिन उखाड़ी जाएगी कुशा, जानें तारीख और धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व माना जाता है। भाद्रपद मास की अमावस्या को कुशाग्रहणी अमावस्या या कुशोत्पाटिनी अमावस्या कहा जाता है। इस दिन पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों में उपयोग होने वाली पवित्र कुशा घास को उखाड़कर सालभर के लिए सुरक्षित रखने की परंपरा है।
कुशाग्रहणी अमावस्या 2026 कब है?
साल 2026 में कुशाग्रहणी अमावस्या 11 सितंबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी। अमावस्या तिथि का प्रारंभ 10 सितंबर 2026 को सुबह करीब 10:33 बजे होगा और इसका समापन 11 सितंबर 2026 को सुबह करीब 8:56 बजे होगा।
क्यों खास है कुशाग्रहणी अमावस्या?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कुशा घास को बेहद पवित्र माना जाता है। पूजा, हवन, श्राद्ध और अन्य धार्मिक कर्मकांडों में कुशा का प्रयोग किया जाता है। मान्यता है कि इस दिन उखाड़ी गई कुशा लंबे समय तक पवित्र रहती है और पूरे साल पूजा-पाठ में इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।
इस दिन क्या किया जाता है?
- सुबह स्नान के बाद भगवान का ध्यान और पूजा की जाती है।
- शुभ समय में कुशा घास को विधि-विधान से उखाड़ा जाता है।
- पितरों की शांति के लिए तर्पण और दान-पुण्य किया जाता है।
- घर में सुख-शांति के लिए धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं।
कुशा का धार्मिक महत्व
हिंदू परंपरा में कुशा को पवित्रता और शुद्धता का प्रतीक माना गया है। यज्ञ, मंत्र जाप और श्राद्ध कर्म में कुशा से बनी पवित्री धारण करने की परंपरा भी है। मान्यता है कि कुशा के बिना कई धार्मिक कार्य अधूरे माने जाते हैं।

