Samachar Nama
×

Krishna Chhathi 2026: कान्हा की छठी पर क्यों रखा जाता है कागज और कलम? जानें क्या है खाली पन्ने की मान्यता
 

Krishna Chhathi 2026: कान्हा की छठी पर क्यों रखा जाता है कागज और कलम? जानें क्या है खाली पन्ने की मान्यता

जन्माष्टमी के बाद भगवान श्रीकृष्ण की छठी मनाने की तैयारियां शुरू हो जाती हैं। इस दिन भक्त बाल गोपाल का अभिषेक करते हैं, उन्हें नए वस्त्र और आभूषण पहनाते हैं और तरह-तरह के पकवानों का भोग लगाते हैं। कई घरों में इस दिन कढ़ी-चावल समेत पारंपरिक व्यंजन बनाने की भी परंपरा है।

कृष्ण छठी से जुड़ी एक खास लोकपरंपरा लोगों का ध्यान खींचती है। कई परिवारों में छठी की रात पूजा स्थल के पास कागज और कलम रखी जाती है। मान्यता से जुड़ा सवाल यह है कि आखिर इन चीजों को क्यों रखा जाता है और कागज पर कुछ लिखना चाहिए या उसे कोरा ही छोड़ना चाहिए?

छठी की रात भाग्य लिखने की मान्यता क्या है?
भारतीय लोकपरंपराओं में बच्चे के जन्म के छठे दिन को विशेष महत्व दिया गया है। मान्यता है कि छठी की रात षष्ठी माता या विधाता माता नवजात के जीवन से जुड़े भाग्य का लेख लिखती हैं।
इसी लोकविश्वास के चलते कई क्षेत्रों में नवजात की छठी पर पूजा स्थल के पास कलम, दवात और कोरा कागज रखने की परंपरा देखने को मिलती है।
भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव में भी बाल स्वरूप के प्रति वात्सल्य और प्रेम को विशेष महत्व दिया जाता है। इसी वजह से कुछ परिवार कृष्ण छठी के अवसर पर नवजात की छठी से जुड़ी लोकपरंपराओं को लड्डू गोपाल की पूजा में भी शामिल करते हैं।

कोरा कागज रखने के पीछे क्या है विश्वास?
इस परंपरा में कागज को जानबूझकर खाली रखने की मान्यता है। भक्त खुद भगवान के भविष्य को लिखने के बजाय कोरे कागज को भविष्य और भाग्य का प्रतीक मानते हैं।

मान्यता के अनुसार जीवन की आगे की कहानी मनुष्य के हाथ में पूरी तरह नहीं होती। इसलिए कागज को कलम के साथ लड्डू गोपाल के पास रखकर श्रद्धालु भगवान से सुख, समृद्धि और मंगल की प्रार्थना करते हैं।

हालांकि, कुछ परिवारों में कागज पर 'श्रीकृष्ण', 'श्रीहरि' या स्वस्तिक बनाने की परंपरा भी मिलती है। यानी यह तरीका क्षेत्र और परिवार की परंपरा के अनुसार अलग हो सकता है।

क्या कागज-कलम रखना जरूरी है?
कृष्ण छठी पर कागज और कलम रखना कोई ऐसा सर्वमान्य अनिवार्य शास्त्रीय नियम नहीं है, जिसे हर भक्त को करना ही पड़े। यह मुख्य रूप से लोकपरंपरा और छठी से जुड़े विश्वासों का हिस्सा है।

भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में कृष्ण छठी मनाने की विधि भी अलग-अलग हो सकती है। कहीं छठी माता की पूजा की जाती है, कहीं चौक सजाया जाता है और कहीं केवल लड्डू गोपाल का अभिषेक, श्रृंगार और भोग लगाया जाता है।

इसलिए अगर किसी परिवार में कागज-कलम रखने की परंपरा नहीं है, तो इसका मतलब यह नहीं कि उनकी पूजा अधूरी है।
कागज और कलम कहां रखें?
जो लोग इस लोकपरंपरा को निभाना चाहते हैं, वे पूजा स्थल की सफाई के बाद लड्डू गोपाल के पास एक साफ कोरा कागज और स्वच्छ कलम रख सकते हैं।

इन्हें भगवान के चरणों पर रखने के बजाय पास में किसी साफ चौकी या थाली में रखना बेहतर माना जा सकता है। इसके साथ दीपक जलाकर भगवान श्रीकृष्ण से परिवार के सुख और कल्याण की प्रार्थना की जा सकती है।
रातभर दीपक जलता छोड़ने के बजाय घर की सुरक्षा को ध्यान में रखना जरूरी है।

पूजा के बाद कागज का क्या करें?
अगर कागज पर कुछ नहीं लिखा गया है, तो उसे फेंकने के बजाय पूजा की किताब या किसी स्वच्छ स्थान पर सुरक्षित रखा जा सकता है। यदि परिवार की परंपरा के अनुसार उस पर श्रीकृष्ण का नाम या स्वस्तिक बनाया गया है, तो उसे पूजा स्थान में रखा जा सकता है।
इस कागज को किसी चमत्कारी वस्तु की तरह देखना उचित नहीं है। इसका महत्व मुख्य रूप से श्रद्धा, शुभ संकल्प और लोकविश्वास से जुड़ा है।
कृष्ण छठी पर सबसे जरूरी है श्रद्धा
कान्हा की छठी पर रखा गया कोरा कागज इस लोकमान्यता का प्रतीक माना जाता है कि जीवन का भविष्य अभी लिखा जाना बाकी है। भक्त बाल गोपाल की पूजा करके अपने परिवार के लिए सुख, शांति और मंगल की कामना करते हैं।
इसलिए कागज-कलम रखना परिवार की परंपरा हो तो इसे श्रद्धा के साथ निभाया जा सकता है, लेकिन इसे अनिवार्य पूजा-विधि मानना जरूरी नहीं है। कृष्ण छठी का मूल भाव भगवान के बाल स्वरूप के प्रति प्रेम, भक्ति और वात्सल्य है।
 

Share this story

Tags