कामाख्या मंदिर के खुले कपाट, अब भक्त कर सकेंगे मां के दर्शन; मिलेगा पवित्र अंगोदक और अंगवस्त्र
अंबुबाची मेले के समापन के बाद असम के प्रसिद्ध कामाख्या मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं। चार दिनों तक विशेष धार्मिक अनुष्ठानों के बाद अब भक्त मां कामाख्या के दर्शन कर सकेंगे। इस दौरान श्रद्धालुओं को मंदिर की ओर से पवित्र अंगोदक और अंगवस्त्र भी प्रसाद स्वरूप प्रदान किए जाएंगे। बड़ी संख्या में देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालु मां के दर्शन के लिए मंदिर पहुंच रहे हैं।
अंबुबाची मेला हर साल उस अवधि में आयोजित किया जाता है, जब धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां कामाख्या रजस्वला होती हैं। इस दौरान मंदिर के कपाट बंद रहते हैं और किसी भी श्रद्धालु को दर्शन की अनुमति नहीं होती। चार दिन पूरे होने के बाद विशेष पूजा-अर्चना और शुद्धिकरण अनुष्ठान के साथ मंदिर के द्वार दोबारा खोले जाते हैं।
क्या होता है अंगोदक और अंगवस्त्र?
अंबुबाची मेले के दौरान श्रद्धालुओं को दो विशेष प्रसाद दिए जाते हैं। अंगोदक वह पवित्र जल होता है, जिसे मां कामाख्या का आशीर्वाद प्राप्त माना जाता है। वहीं अंगवस्त्र लाल रंग का पवित्र कपड़ा होता है, जिसे देवी की शक्ति और कृपा का प्रतीक माना जाता है। भक्त इसे अपने घर में श्रद्धापूर्वक सुरक्षित रखते हैं।
मंदिर खुलने के बाद दर्शन का समय
मंदिर के कपाट खुलने के बाद श्रद्धालु निर्धारित समय के अनुसार दर्शन कर सकते हैं। भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने दर्शन की विशेष व्यवस्था की है। श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे नियमों का पालन करें और प्रशासन के निर्देशों का सहयोग करें।
देशभर से उमड़ रहे श्रद्धालु
अंबुबाची मेला भारत के सबसे बड़े शक्ति उपासना पर्वों में से एक माना जाता है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु, साधु-संत और तांत्रिक इस मेले में शामिल होते हैं। कपाट खुलने के साथ ही एक बार फिर कामाख्या मंदिर में भक्तों की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई हैं। मंदिर प्रशासन ने सुरक्षा, चिकित्सा और भीड़ प्रबंधन के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं।
धार्मिक मान्यता
मान्यता है कि मां कामाख्या शक्ति, समृद्धि और मनोकामना पूर्ण करने वाली देवी हैं। अंबुबाची मेले के बाद होने वाले दर्शन को विशेष रूप से शुभ माना जाता है। श्रद्धालु इस अवसर पर मां के दर्शन कर सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं।

