Samachar Nama
×

कजरी तीज 2026: पूजा के लिए नोट कर लें पूरी सामग्री लिस्ट, शिव-पार्वती की मूर्ति से लेकर सोलह शृंगार तक जानें क्या-क्या चाहिए

कजरी तीज 2026: पूजा के लिए नोट कर लें पूरी सामग्री लिस्ट, शिव-पार्वती की मूर्ति से लेकर सोलह शृंगार तक जानें क्या-क्या चाहिए

कजरी तीज का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन महिलाएं पति की लंबी आयु, सुखी दांपत्य जीवन और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना से व्रत रखती हैं। साल 2026 में कजरी तीज का व्रत 31 अगस्त, सोमवार को रखा जाएगा। तृतीया तिथि 30 अगस्त की सुबह शुरू होकर 31 अगस्त की सुबह समाप्त होगी, इसलिए उदया तिथि के अनुसार 31 अगस्त को कजरी तीज मनाई जाएगी।

पूजा को विधि-विधान से करने के लिए सामग्री पहले से तैयार कर लेना अच्छा माना जाता है। आइए जानते हैं कजरी तीज की संपूर्ण पूजा सामग्री और जरूरी नियम।

कजरी तीज पूजा सामग्री की पूरी लिस्ट

कजरी तीज की पूजा के लिए भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा, पूजा की चौकी और चौकी पर बिछाने के लिए पीला या लाल कपड़ा रखें। इसके साथ कलश, नारियल, सुपारी, अक्षत, दूर्वा, मौली या कच्चा सूत, रोली, कुमकुम और चंदन की जरूरत होगी।

पूजा में घी, रुई की बत्ती, दीपक, कपूर, धूप या अगरबत्ती भी रखें। भगवान शिव को अर्पित करने के लिए बेलपत्र, शमी के पत्ते, भांग और धतूरा जैसी सामग्री भी कई परंपराओं में शामिल की जाती है।

अभिषेक के लिए गंगाजल, गाय का दूध, दही, घी, शहद और मिश्री रखें। इनसे पंचामृत तैयार किया जा सकता है। इसके अलावा मौसमी फल, मिठाई और भोग की सामग्री भी पूजा में रखी जाती है।

माता पार्वती के लिए सोलह शृंगार

कजरी तीज पर माता पार्वती को सुहाग की सामग्री अर्पित करने की परंपरा है। इसके लिए साड़ी या चुनरी, सिंदूर, बिंदी, कुमकुम, चूड़ियां, मेहंदी, महावर, कंघी, दर्पण, इत्र और बिछुआ जैसी वस्तुएं रखी जा सकती हैं। कई स्थानों पर सुहाग की अन्य सामग्री भी अर्पित की जाती है।

मान्यता है कि माता पार्वती को श्रद्धा से सुहाग सामग्री अर्पित करने से अखंड सौभाग्य की कामना की जाती है। हालांकि अलग-अलग क्षेत्रों में सोलह शृंगार की सूची और पूजा की परंपरा में थोड़ा अंतर हो सकता है।

ऐसे करें कजरी तीज की पूजा

सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें और व्रत का संकल्प लें। इसके बाद पूजा स्थल को साफ करके चौकी पर कपड़ा बिछाएं और भगवान शिव तथा माता पार्वती की प्रतिमा स्थापित करें। कलश स्थापित करने के बाद दीपक जलाएं और गणेश जी का स्मरण करते हुए पूजा शुरू करें।

भगवान शिव को जल, गंगाजल, दूध, बेलपत्र, चंदन और पुष्प अर्पित करें। माता पार्वती को रोली, कुमकुम, सिंदूर, फूल और सुहाग सामग्री अर्पित करें। इसके बाद कजरी तीज की व्रत कथा सुनें और भगवान शिव-पार्वती की आरती करें।

कई क्षेत्रों में कजरी तीज की शाम नीमड़ी माता की पूजा करने और रात में चंद्रमा को अर्घ्य देने की परंपरा भी है। क्षेत्रीय परंपरा और अपने परिवार की पूजा-पद्धति के अनुसार विधि में अंतर हो सकता है।

Share this story

Tags