ज्येष्ठ अधिक मास 17 मई से शुरू: जानें क्यों आता है ‘अधिक मास’ और क्या हैं इस महीने के शुभ नियम
हिन्दू पंचांग के अनुसार इस वर्ष ज्येष्ठ अधिक मास 17 मई से शुरू होने जा रहा है। इसे धार्मिक दृष्टि से बेहद विशेष और पुण्यकारी महीना माना जाता है। इस दौरान पूजा-पाठ, भक्ति और दान का विशेष महत्व होता है।
क्यों आता है ‘अधिक मास’?
हिन्दू पंचांग चंद्रमा की गति पर आधारित होता है, जबकि सूर्य वर्ष सौर गणना पर चलता है। दोनों के बीच तालमेल बनाए रखने के लिए हर कुछ वर्षों में एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है, जिसे अधिक मास कहा जाता है।
इसे “मलमास” भी कहा जाता है और यह लगभग 32 महीने 16 दिन के अंतराल पर आता है। इस कारण यह सामान्य 12 महीनों के अतिरिक्त 13वां महीना माना जाता है।
धार्मिक महत्व
अधिक मास को भगवान विष्णु का प्रिय महीना माना जाता है। इस दौरान किए गए जप, तप, दान और व्रत का फल कई गुना बढ़कर मिलता है। इसलिए इसे अत्यंत शुभ और आध्यात्मिक साधना का समय माना जाता है।
इस महीने में क्या करें?
अधिक मास में कुछ विशेष धार्मिक कार्य करने की परंपरा है—
- भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की पूजा
- विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ
- दान-पुण्य जैसे अन्न, वस्त्र और धन का दान
- गीता पाठ और भजन-कीर्तन
- व्रत और संयमित जीवनशैली अपनाना
क्या न करें?
इस माह को सामान्यतः नए शुभ कार्यों जैसे शादी, गृह प्रवेश या बड़े व्यवसायिक निवेश के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता। हालांकि धार्मिक कार्यों पर कोई रोक नहीं होती।

