Jupiter Retrograde December 2026: दिवाली के बाद वक्री होंगे गुरु, इन राशियों के खुल सकते हैं भाग्य के द्वार
ज्योतिष शास्त्र में देवगुरु बृहस्पति (Jupiter) को ज्ञान, धन, संतान, विवाह, भाग्य और आध्यात्मिक उन्नति का कारक ग्रह माना जाता है। जब भी गुरु अपनी चाल में बदलाव करते हैं तो इसका प्रभाव सभी 12 राशियों के जीवन पर देखने को मिलता है। साल 2026 में दिवाली के बाद गुरु ग्रह अपनी गति बदलते हुए वक्री अवस्था में प्रवेश करेंगे। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार गुरु की यह वक्री चाल कई राशियों के लिए शुभ फल देने वाली हो सकती है।
दिसंबर 2026 में वक्री होंगे गुरु
ज्योतिष गणनाओं के अनुसार दिसंबर 2026 में देवगुरु बृहस्पति वक्री चाल शुरू करेंगे। गुरु का वक्री होना कई बार पुराने अवसरों की वापसी, रुके हुए कार्यों में गति और जीवन में नई संभावनाओं का संकेत माना जाता है। हालांकि इसका प्रभाव व्यक्ति की जन्म कुंडली में गुरु की स्थिति और अन्य ग्रहों के प्रभाव पर भी निर्भर करता है।
इन राशियों को मिल सकता है विशेष लाभ
1. मेष राशि (Aries)
गुरु की वक्री चाल मेष राशि वालों के लिए आर्थिक और करियर के लिहाज से लाभकारी साबित हो सकती है। नौकरी में नए अवसर मिल सकते हैं और व्यापार से जुड़े लोगों को पुराने निवेश से फायदा मिलने के संकेत हैं। लंबे समय से अटके काम पूरे हो सकते हैं। परिवार में भी सुख-शांति बढ़ सकती है।
2. मिथुन राशि (Gemini)
मिथुन राशि के जातकों के लिए गुरु की वक्री चाल ज्ञान और सफलता के नए रास्ते खोल सकती है। शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षा और रिसर्च से जुड़े लोगों को अच्छे परिणाम मिल सकते हैं। करियर में बदलाव की सोच रहे लोगों को सफलता मिलने के योग बन सकते हैं।
3. सिंह राशि (Leo)
सिंह राशि वालों के लिए यह समय भाग्य का साथ देने वाला माना जा रहा है। समाज में मान-सम्मान बढ़ सकता है और नए लोगों से संपर्क लाभ पहुंचा सकते हैं। आर्थिक स्थिति मजबूत होने के संकेत हैं। निवेश से जुड़े फैसलों में सावधानी के साथ लाभ मिल सकता है।
4. तुला राशि (Libra)
तुला राशि के जातकों को गुरु की वक्री चाल से धन और रिश्तों के मामले में सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं। परिवार में शुभ कार्य होने के योग बन सकते हैं। नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन या नई जिम्मेदारी मिल सकती है।
5. धनु राशि (Sagittarius)
धनु राशि के स्वामी ग्रह स्वयं गुरु हैं, इसलिए गुरु की चाल में बदलाव का असर इस राशि पर खास माना जाता है। आत्मविश्वास बढ़ सकता है और जीवन में नई दिशा मिल सकती है। धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों में रुचि बढ़ेगी। विदेश यात्रा या उच्च शिक्षा के अवसर भी बन सकते हैं।
क्या होता है गुरु का वक्री होना?
ज्योतिष में वक्री ग्रह को विशेष प्रभावशाली माना जाता है। गुरु जब वक्री होते हैं तो व्यक्ति को अपने पुराने फैसलों पर विचार करने, अधूरे कार्यों को पूरा करने और नई योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू करने का अवसर मिल सकता है। यह समय आत्ममंथन और सीखने का भी माना जाता है।
हालांकि ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार किसी भी ग्रह के शुभ या अशुभ प्रभाव का निर्धारण केवल राशि से नहीं बल्कि जन्म कुंडली में ग्रहों की स्थिति, दशा और भावों के आधार पर किया जाता है।

