Janmashtami Special: परिवार की यादें और कान्हा की भक्ति: जानिए कैसे जन्माष्टमी मना रही हैं गौरी गोपाल आश्रम की माताएं
जन्माष्टमी का त्योहार आते ही मथुरा-वृंदावन का माहौल कृष्ण भक्ति से सराबोर हो जाता है। मंदिरों और आश्रमों में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की तैयारियां कई दिन पहले से शुरू हो जाती हैं। इसी बीच गौरी गोपाल वृद्ध आश्रम में रहने वाली बुजुर्ग महिलाओं के लिए भी जन्माष्टमी बेहद खास है। यहां रहने वाली महिलाएं पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ कान्हा का जन्मोत्सव मनाती हैं।
आश्रम में रहने वाली महिलाओं ने न्यूज एजेंसी IANS से बातचीत में बताया कि यहां उन्हें न सिर्फ भगवान कृष्ण की भक्ति का माहौल मिलता है, बल्कि परिवार जैसा अपनापन और देखभाल भी महसूस होती है।
दो साल से आश्रम में रह रही हैं बीना
आश्रम में रहने वाली बीना ने बताया कि उन्हें यहां रहते हुए करीब दो साल हो चुके हैं। उनके मुताबिक आश्रम में रहने के दौरान उन्हें किसी तरह की परेशानी नहीं होती। खाने-पीने से लेकर दूध और दवाइयों तक की व्यवस्था अच्छी है और जरूरत के हिसाब से उन्हें सभी जरूरी सुविधाएं मिलती हैं।
बीना के मुताबिक जन्माष्टमी का त्योहार आश्रम में खास तरीके से मनाया जाता है और इसकी तैयारियां कई दिन पहले ही शुरू हो जाती हैं।
रात 12 बजे होता है कान्हा का जन्मोत्सव
बीना ने बताया कि जन्माष्टमी की रात करीब 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाता है। इस दौरान खीरे से जुड़ी पारंपरिक रस्म भी निभाई जाती है। कान्हा के जन्म के बाद उन्हें भोग लगाया जाता है।
व्रत के दौरान खाए जाने वाले सिंघाड़े और तिखुर जैसी चीजों का भी भोग लगाया जाता है। उन्होंने बताया कि आश्रम में अनिरुद्धाचार्य महाराज की ओर से भी प्रसाद और अन्य व्यवस्थाएं की जाती हैं।
बेटी आज भी रखती है मां का ख्याल
बीना ने बताया कि अब उनके मायके या परिवार से बहुत कम लोग मिलने आते हैं। हालांकि, उनकी बेटी और दामाद समय-समय पर उनसे मिलने जरूर आते हैं।
बेटी उनके लिए साड़ी, ब्लाउज, कंबल और जरूरत का दूसरा सामान लेकर आती है। बीना के लिए परिवार की ओर से मिलने वाला यह अपनापन बेहद मायने रखता है।
'घर की याद अब बहुत कम आती है'
आश्रम में मिलने वाली सेवा और अपनापन बताते हुए बीना भावुक हो जाती हैं। उनका कहना है कि यहां आने के बाद उन्हें घर की याद बहुत कम आती है।
उन्होंने बताया कि महाराज जी और आश्रम से जुड़े लोग जिस तरह बुजुर्ग महिलाओं की सेवा और देखभाल करते हैं, उससे उन्हें परिवार जैसा महसूस होता है।
बीना खुद भी कृष्ण भक्ति में काफी समय बिताती हैं। वह भगवान के नाम और धार्मिक पंक्तियां लिखती रहती हैं। बातचीत के दौरान उन्होंने भगवान कृष्ण और राम को समर्पित भजन 'कभी राम बनके, कभी श्याम बनके' भी सुनाया।
दूसरी बुजुर्ग महिला ने भी बताई अपनी कहानी
आश्रम में रहने वाली एक अन्य महिला ने बताया कि वह भी करीब दो साल से यहां रह रही हैं। उनके मुताबिक गुरु जी ने उन्हें बहुत अच्छे से रखा है और यहां उन्हें किसी चीज की कमी महसूस नहीं होती।
उन्होंने बताया कि दूध, चाय, नाश्ता, खाना और दूसरी जरूरी चीजें समय पर मिलती हैं। उनके अनुसार जिस तरह की देखभाल यहां बुजुर्ग महिलाओं की होती है, वह हर जगह मिलना आसान नहीं है।
परिवार के लिए बहुत कुछ किया, फिर खुद को सहारे की जरूरत पड़ी
महिला ने अपने जीवन के बारे में बताते हुए कहा कि उनकी मां अब इस दुनिया में नहीं हैं। उन्होंने अपने भाई को बड़ा किया और परिवार की जिम्मेदारियां निभाईं। बाद में भाई की शादी हुई और उसके बच्चे भी हुए।
उन्होंने बताया कि उन्होंने बड़े परिवारों के घरों में बच्चों की देखभाल का काम भी किया। समय के साथ परिवार के लोग अपनी-अपनी जिंदगी में व्यस्त होते गए और एक वक्त ऐसा आया जब उन्हें खुद किसी सहारे की जरूरत महसूस होने लगी।
इसी दौरान उन्हें गौरी गोपाल आश्रम के बारे में जानकारी मिली और वह यहां आ गईं। अब आश्रम में उन्हें रहने, खाने और जरूरी सुविधाओं के साथ-साथ भक्ति और अपनापन भी मिल रहा है। जन्माष्टमी उनके लिए इसी वजह से सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि कान्हा के प्रति अपनी आस्था और जीवन में मिले नए सहारे को महसूस करने का खास अवसर बन गई है।

