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Jagannath Puri Rath Yatra 2026: रथ यात्रा से पहले निभाई जाती है ‘छेरा पहरा’ रस्म, सोने की झाड़ू से रास्ता साफ करते हैं राजा; जानें महत्व

Jagannath Puri Rath Yatra 2026: रथ यात्रा से पहले निभाई जाती है ‘छेरा पहरा’ रस्म, सोने की झाड़ू से रास्ता साफ करते हैं राजा; जानें महत्व

पुरी की प्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक मानी जाती है। हर साल आषाढ़ महीने में भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा नगर भ्रमण के लिए निकलते हैं। इस भव्य यात्रा से पहले एक विशेष परंपरा निभाई जाती है, जिसे ‘छेरा पहरा’ (Chhera Pahara) कहा जाता है। इस रस्म में पुरी के गजपति महाराज स्वयं सोने के हैंडल वाली झाड़ू से रथ के सामने की जमीन की सफाई करते हैं।

धार्मिक मान्यता है कि इस परंपरा के माध्यम से यह संदेश दिया जाता है कि भगवान के सामने हर व्यक्ति समान है और सेवा भाव सबसे बड़ा धर्म है।

जगन्नाथ रथ यात्रा 2026 कब होगी?

हिंदू पंचांग के अनुसार जगन्नाथ रथ यात्रा आषाढ़ शुक्ल द्वितीया तिथि को निकाली जाती है। साल 2026 में यह पवित्र रथ यात्रा 16 जुलाई 2026 से शुरू होगी। इस दिन भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा अपने-अपने विशाल रथों पर सवार होकर गुंडिचा मंदिर की ओर प्रस्थान करेंगे।

रथ यात्रा के दौरान लाखों श्रद्धालु भगवान के दर्शन और रथ खींचने के लिए पुरी पहुंचते हैं। यह उत्सव कई दिनों तक चलता है और भगवान की वापसी यात्रा यानी बहुड़ा यात्रा के साथ इसका समापन होता है।

क्या है छेरा पहरा रस्म?

छेरा पहरा जगन्नाथ रथ यात्रा की सबसे महत्वपूर्ण परंपराओं में से एक है। इस रस्म में पुरी के गजपति महाराज रथों के आसपास सोने के हैंडल वाली झाड़ू से सफाई करते हैं और चंदन मिले जल का छिड़काव करते हैं।

इस परंपरा का उद्देश्य यह दर्शाना है कि भगवान जगन्नाथ के सामने राजा भी एक सेवक के समान हैं। यह रस्म राजा के अहंकार को त्यागकर भगवान की सेवा करने का प्रतीक मानी जाती है।

सोने की झाड़ू का क्या है महत्व?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सोने की झाड़ू केवल राजसी वैभव का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह भगवान के प्रति समर्पण और सेवा भावना को दर्शाती है। सामान्य रूप से सफाई का काम छोटा माना जाता है, लेकिन छेरा पहरा रस्म के जरिए बताया जाता है कि भगवान की सेवा में कोई काम छोटा या बड़ा नहीं होता।

यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और आज भी पूरी श्रद्धा के साथ निभाई जाती है।

क्यों खास है जगन्नाथ रथ यात्रा?

जगन्नाथ रथ यात्रा में भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा तीन अलग-अलग विशाल रथों पर विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देते हैं। मान्यता है कि इस यात्रा में शामिल होने और भगवान के रथ को खींचने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।

रथ यात्रा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, परंपरा और आस्था का प्रतीक भी है। छेरा पहरा जैसी रस्में इस बात को दर्शाती हैं कि भक्ति में पद, प्रतिष्ठा और धन-दौलत का कोई महत्व नहीं होता, बल्कि सच्ची श्रद्धा और सेवा भाव ही सबसे बड़ा स्थान रखते हैं।

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