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करवाचौथ पर सरगी खाने से पहले नहाना जरूरी है? जानें सरगी से जुड़े ये नियम
 

करवाचौथ पर सरगी खाने से पहले नहाना जरूरी है? जानें सरगी से जुड़े ये नियम

लंबी उम्र, अच्छी सेहत और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ व्रत रखती हैं। करवा चौथ की शुरुआत सूर्योदय से पहले सरगी खाने की परंपरा से होती है। सरगी केवल भोजन नहीं, बल्कि सास की ओर से बहू को मिलने वाले स्नेह, आशीर्वाद और शुभकामनाओं का प्रतीक भी मानी जाती है। ऐसे में कई महिलाओं के मन में सवाल रहता है कि क्या सरगी खाने से पहले स्नान करना जरूरी है और इसे ग्रहण करने के क्या नियम हैं।

सरगी खाने से पहले नहाना जरूरी है या नहीं?

धार्मिक परंपराओं के अनुसार, करवा चौथ के दिन महिलाएं सुबह जल्दी उठकर स्नान करती हैं और स्वच्छ कपड़े पहनने के बाद सरगी ग्रहण करती हैं। इसके बाद वे व्रत का संकल्प लेती हैं। स्नान को पूजा-पाठ से पहले शारीरिक और मानसिक शुद्धता से जोड़कर देखा जाता है।

हालांकि, सरगी खाने से पहले स्नान करना हर परिवार में अनिवार्य नियम के रूप में नहीं माना जाता। अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में रीति-रिवाज अलग हो सकते हैं। इसलिए महिलाएं अपनी पारिवारिक परंपरा और मान्यताओं के अनुसार सरगी खा सकती हैं। धार्मिक मान्यता में स्वच्छता और श्रद्धा को विशेष महत्व दिया जाता है।

सरगी खाने का सही समय क्या है?

करवा चौथ पर सरगी सूर्योदय से पहले खाई जाती है। मान्यता के अनुसार, इस दौरान भोजन करने के बाद महिलाएं दिनभर व्रत रखती हैं और रात में चंद्रमा के दर्शन तथा पूजा के बाद व्रत खोलती हैं।

साल 2026 में करवा चौथ का पर्व 29 अक्टूबर, गुरुवार को मनाया जाएगा। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, इस दिन सरगी ग्रहण करने का ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 54 मिनट से 5 बजकर 45 मिनट तक बताया गया है। हालांकि, पूजा और पंचांग का समय शहर के अनुसार अलग हो सकता है। इसलिए अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार समय की पुष्टि करना उचित रहेगा।

सरगी की थाली में क्या-क्या रखना चाहिए?

सरगी की थाली में ऐसी चीजें शामिल की जाती हैं, जो व्रत शुरू करने से पहले शरीर को ऊर्जा देने में मदद करें। पारंपरिक रूप से सरगी सास अपनी बहू को देती हैं। इसमें फल, मिठाइयां, सूखे मेवे, नारियल, दूध या फेनी जैसी चीजें रखी जाती हैं। कई परिवारों में परांठे और अन्य घरेलू पकवान भी शामिल किए जाते हैं।

सरगी की थाली में सिंदूर, चूड़ियां, बिंदी और मेहंदी जैसी सुहाग सामग्री रखने की परंपरा भी है। इन्हें सौभाग्य और वैवाहिक सुख का प्रतीक माना जाता है। यदि सास किसी कारण से सरगी नहीं दे सकतीं, तो कुछ परिवारों में जेठानी या परिवार की दूसरी महिला यह रस्म निभाती है।

सरगी खाते समय किन बातों का रखें ध्यान?

सरगी में बहुत ज्यादा तला-भुना, मसालेदार या नमकीन भोजन खाने से प्यास और बेचैनी बढ़ सकती है। इसलिए संतुलित और पौष्टिक भोजन लेना बेहतर माना जाता है। फल, दूध, दही और सूखे मेवे जैसे विकल्प उपयोगी हो सकते हैं। पर्याप्त पानी पीने का ध्यान सरगी के समय रखें, खासकर यदि आप निर्जला व्रत रखने वाली हैं।

सरगी ग्रहण करने के बाद सूर्योदय होने पर व्रत शुरू करने की परंपरा है। इसके बाद महिलाएं अपनी मान्यता के अनुसार पूजा, कथा और अन्य धार्मिक रस्में पूरी करती हैं। रात में चंद्रमा के दर्शन कर अर्घ्य देने के बाद व्रत खोला जाता है।

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